नई दिल्ली, 28 मार्च (आईएएनएस)। भारतीय सेना की सदर्न कमांड (दक्षिणी कमान) ने ‘मिलिट्री सिविल फ्यूजन अभियान’ के तहत बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए। इस अभियान में सेना, प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियां, शैक्षणिक संस्थान और उद्योग जगत के लोगों ने मिलकर काम किया, ताकि देश की सुरक्षा और आपात स्थितियों से निपटने की तैयारी और मजबूत हो सके।
यह अभियान महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और दक्षिण भारत के कई इलाकों में चलाया गया। इसका उद्देश्य अलग-अलग संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाना और किसी भी खतरे या आपदा के समय मिलकर काम करने की क्षमता बढ़ाना था।
इस अभियान में इंडियन आर्मी के साथ-साथ केंद्रीय सुरक्षा बल, राज्य पुलिस, सिविल प्रशासन, आपदा प्रबंधन एजेंसियां, हवाई अड्डा और विमानन विभाग, वन और खनन विभाग, एनसीसी, कॉलेज और उद्योगों ने भाग लिया। सभी ने मिलकर सुरक्षा, हवाई क्षेत्र की निगरानी, आपदा प्रबंधन और नई तकनीकों के इस्तेमाल जैसे मुद्दों पर काम किया।
पुणे स्थित मुख्यालय में एक उच्च-स्तरीय अभ्यास (टेबल-टॉप एक्सरसाइज) भी किया गया, जिसमें अंदरूनी क्षेत्रों में बढ़ते खतरों पर चर्चा हुई। इस बैठक की अध्यक्षता लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने की और इसमें महाराष्ट्र सरकार, रेलवे और अन्य एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
अभियान के तहत अलग-अलग शहरों में विशेष कार्यक्रम भी हुए। जिसमें पुणे के औंध में सेना, पुलिस और प्रशासन ने मिलकर अभ्यास, भोपाल में ड्रोन खतरों से निपटने पर सेमिनार, बाबीना में सेना, पुलिस और अन्य विभागों ने संयुक्त गश्त और निगरानी, चेन्नई में सुरक्षा सम्मेलन और बेलगावी, हैदराबाद, जोधपुर और जैसलमेर में भी कई गतिविधियां हुईं।
इन सभी कार्यक्रमों की खास बात यह रही कि सभी एजेंसियां एक साथ मिलकर काम करती दिखीं। इससे आपसी भरोसा बढ़ा, जानकारी साझा करना आसान हुआ और फैसले जल्दी लेने में मदद मिली।
इस अभियान ने यह साफ कर दिया कि आज के समय में सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को अकेले हल नहीं किया जा सकता। इसके लिए सेना और बाकी सभी सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं का मिलकर काम करना जरूरी है।
सदर्न कमांड का यह प्रयास भविष्य के लिए एक मजबूत और बेहतर तैयार सिस्टम बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।




