नई दिल्ली, 21 मार्च (आईएएनएस)। भारत के पूर्व नंबर 1 खिलाड़ी सौरव घोषाल ने स्क्वैश खिलाड़ियों को दुनिया के बेहतरीन एथलीटों में से एक बताया है। सौरव ने कहा कि उन्हें अपनी काबिलियत दिखाने के लिए वह सबसे बड़ा मंच मिल गया है जिसके वे हकदार हैं—ओलंपिक।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि स्क्वैश को अपनी वैश्विक पहचान बढ़ाने और आधुनिक उपभोग के तरीकों के हिसाब से खुद को ढालने की सख्त जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह खेल अब सिर्फ दूसरे खेलों से ही मुकाबला नहीं कर रहा है, बल्कि ओलंपिक में अपनी पहली एंट्री की तैयारी करते हुए, लोगों का ध्यान खींचने के लिए हर चीज और हर किसी से मुकाबला कर रहा है।
स्क्वैश 2028 के समर ओलंपिक में शामिल होने वाला है, इसलिए घोषाल ने कहा कि इस खेल को दुनिया भर में अपनी भागीदारी और दर्शकों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी करके अपनी अहमियत साबित करनी होगी। उन्होंने कहा, “लॉस एंजिल्स 2028 में जगह बनाना हमारे लिए वाकई एक बड़ी उपलब्धि है। ओलंपिक में शामिल होने का यह सफर काफी लंबा रहा है। इसमें कोई शक नहीं है कि दुनिया के शीर्ष स्क्वैश खिलाड़ी दुनिया के बेहतरीन एथलीटों में से एक हैं और अपनी काबिलियत दिखाने के लिए वे खेल के सबसे बड़े मंच ओलंपिक के हकदार हैं।”
हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सिर्फ ओलंपिक में शामिल हो जाना ही इस खेल के लंबे समय तक बने रहने के लिए काफी नहीं है।उन्होंने कहा, “एक खेल के तौर पर हमें दुनिया भर में अपनी भागीदारी बढ़ानी होगी। अभी यह ठीक-ठाक है, लेकिन अगर हम वाकई बड़े इवेंट्स में अपनी जगह पक्की करना चाहते हैं और अहम चर्चाओं में शामिल होना चाहते हैं, तो हमें इसमें जबरदस्त बढ़ोतरी करनी होगी।”
घोषाल ने इस बढ़ोतरी को हासिल करने के लिए कुछ अहम कदम भी सुझाए, जिनमें खेल की ज्यादा से ज्यादा पब्लिसिटी और इसे जमीनी स्तर पर लोगों तक पहुंचाना शामिल है। “ऐसा करने का एक तरीका यह है कि इसे टीवी पर दिखाया जाए। दर्शकों की संख्या बहुत मायने रखती है। जिन देशों में यह खेल पहले से ही लोकप्रिय है, वहां इसकी लोकप्रियता को और भी बड़े पैमाने पर बढ़ाया जाए। इसे ज्यादा से ज्यादा स्कूलों तक पहुंचाया जाए। लोगों को इस खेल से जोड़ने और उनका मनोरंजन करने के लिए वर्ल्ड प्रीमियर स्क्वैश जैसे दिलचस्प फॉर्मेट तैयार किए जाएं।”
दर्शकों के जुड़ाव के बदलते तरीकों पर रोशनी डालते हुए, घोषाल ने कहा कि स्क्वैश को इस बात पर फिर से सोचना होगा कि आज की दुनिया में वह लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए किस तरह मुकाबला करे। “हमें यह समझना होगा कि हम सिर्फ दूसरे खेलों के साथ लोगों का ध्यान खींचने की होड़ में नहीं हैं। हम इस दुनिया की हर चीज के साथ लोगों का ध्यान खींचने की होड़ में हैं—चाहे वह कोई सिटकॉम हो, सोशल मीडिया क्रिएटर्स की आम रील्स हों या कुछ भी। इसलिए हमें इस बात को स्वीकार करना होगा, इसे अपनाना होगा और लोगों के एक बड़े तबके से जुड़ने के तरीके खोजने होंगे। लोगों का यह तबका जितना बड़ा होगा, इंटरनेशनल ओलंपिक कमिटी उतने ही ज्यादा विश्वास के साथ स्क्वैश को ओलंपिक में शामिल करना चाहेगी।”

