सूर्य की गतिविधि से बनता है ‘स्पेस वेदर’, जानें पृथ्वी को कैसे करता है प्रभावित

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नई दिल्ली, 30 मार्च (आईएएनएस)। सूर्य पृथ्वी से लगभग 93 मिलियन मील (150 मिलियन किलोमीटर) दूर है, फिर भी उसकी गतिविधियां हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती हैं। सूर्य की सतह पर होने वाली गतिविधियों से बनने वाले मौसम को ‘अंतरिक्ष मौसम’ या स्पेस वेदर कहा जाता है।

यह अपने सबसे खतरनाक रूप में सैटेलाइट्स को नुकसान पहुंचा सकता है और पृथ्वी पर बिजली व्यवस्था को ठप कर सकता है। अंतरिक्ष मौसम का अध्ययन बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि पृथ्वी पर जिंदगी सैटेलाइट, संचार और बिजली प्रणालियों पर काफी हद तक निर्भर है। वैज्ञानिक लगातार इस पर नजर रखे हुए हैं ताकि किसी भी बड़े खतरे से पहले तैयारी की जा सके।

वैज्ञानिक बताते हैं कि अंतरिक्ष मौसम क्या है? सूर्य लगातार गैस और आवेशित कणों की धारा अंतरिक्ष में छोड़ता रहता है। इसे ‘सौर पवन’ कहते हैं। ये कण सूर्य के बाहरी वायुमंडल यानी ‘कोरोना’ से निकलते हैं। सौर पवन इन कणों को पृथ्वी की ओर करीब 10 लाख मील प्रति घंटे की तेज रफ्तार से ले जाती है।

हालांकि पृथ्वी की प्राकृतिक ढाल यानी पृथ्वी के चारों ओर एक मजबूत चुंबकीय क्षेत्र है, जो एक ढाल की तरह काम करता है। यह चुंबकीय क्षेत्र और वायुमंडल मिलकर सौर पवन के अधिकांश कणों को रोक लेते हैं। ये कण चुंबकीय क्षेत्र से टकराकर पृथ्वी के चारों ओर बह जाते हैं। चुंबकीय क्षेत्र का सूर्य की ओर वाला हिस्सा चपटा हो जाता है, जबकि दूसरा हिस्सा लंबी पूंछ की तरह फैल जाता है।

हालांकि, कभी-कभी ये आवेशित कण पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को भेदकर वायुमंडल में घुस जाते हैं। इन कणों के वायुमंडल से टकराने पर रंग-बिरंगी रोशनी पैदा होती है, जिसे ‘ऑरोरा’ कहा जाता है। उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्रों में यह खूबसूरत प्रकाश नजारा देखने को मिलता है।

कभी-कभी सूर्य पर तीव्र चुंबकीय गतिविधि के कारण शक्तिशाली ‘सौर तूफान’ आते हैं। इन तूफानों में सौर पवन बहुत ज्यादा तेज और खतरनाक हो जाती है। ये तूफान अचानक आ सकते हैं और कुछ ही मिनटों में पृथ्वी तक पहुंच सकते हैं। इनके प्रभाव से उपग्रहों की कार्यप्रणाली बिगड़ सकती है, जीपीएस सिस्टम प्रभावित हो सकता है और पृथ्वी पर बिजली की सप्लाई तक ठप हो सकती है।

इस पर वैज्ञानिक निगरानी रखते हैं। इसके लिए वे सौर तूफानों की पहले से भविष्यवाणी करने की कोशिश करते हैं। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा की सोलर एंड हेलियोस्फेरिक ऑब्जर्वेटरी, कोरोनल मास इजेक्शन की निगरानी करती है। सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी और नोआ सैटेलाइट सीरीज सूर्य की निरंतर निगरानी करते हैं। ये उपग्रह सौर तूफानों की चेतावनी पहले से जारी करते हैं, जिससे नुकसान को कम किया जा सकता है।