तमिलनाडु का बकाया कर्ज 2026-27 में 10.71 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा: मंत्री थंगम थेन्नारसु

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चेन्नई, 17 फरवरी (आईएएनएस)। तमिलनाडु के बकाया पब्लिक कर्ज़ 2026-27 में 10.71 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। यह जानकारी फाइनेंस मिनिस्टर थंगम थेन्नारासु ने मंगलवार को विधानसभा में इंटरिम बजट पेश करते हुए दी।

2026-27 के इंटरिम बजट एस्टिमेट्स के अनुसार, राज्य का कर्ज़ 2025-26 के रिवाइज्ड एस्टिमेट्स में 9.52 लाख करोड़ रुपये से बढ़ने की संभावना है। पहले के बजट एस्टिमेट्स में यह रकम 9.29 लाख करोड़ रुपये थी।

फाइनेंस मिनिस्टर ने स्पष्ट किया कि 2025-26 के रिवाइज्ड एस्टिमेट्स में चेन्नई मेट्रो रेल फेज-II प्रोजेक्ट से जुड़े 9,523 करोड़ रुपये शामिल हैं, जिसे सेंट्रल सेक्टर प्रोजेक्ट के तौर पर मंजूरी मिली थी। उन्होंने कहा कि यह रकम केंद्र सरकार के अकाउंट्स में दिखनी चाहिए। लेकिन, बार-बार अनुरोध करने के बावजूद केंद्र सरकार ने ज़रूरी बुकिंग एंट्री नहीं की, जिससे राज्य का कर्ज़ बनावटी तौर पर बढ़ गया।

उन्होंने बताया कि इस रकम को छोड़कर, राज्य का बकाया कर्ज 2025-26 के रिवाइज्ड एस्टिमेट में 9.42 लाख करोड़ रुपये और 2026-27 के इंटरिम बजट एस्टिमेट में 10.62 लाख करोड़ रुपये होगा।

2026-27 के लिए राज्य ने योजना बनाई है कि वह 1.79 लाख करोड़ रुपये उधार लेगा और 60,413.42 करोड़ रुपये चुकाएगा। इस कर्ज़ का ग्रॉस स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट (जीएसडीपी) के साथ अनुपात 26.12 प्रतिशत होने का अनुमान है।

अंतरिम बजट में 2026-27 के लिए 48,696.32 करोड़ रुपये के रेवेन्यू डेफिसिट का अनुमान लगाया गया है। तुलना करें तो 2025-26 के रिवाइज्ड एस्टिमेट्स में रेवेन्यू डेफिसिट 69,219 करोड़ रुपये था, जबकि उस साल के ओरिजिनल बजट एस्टिमेट्स में यह 41,635 करोड़ रुपये था।

फाइनेंस मिनिस्टर थेन्नारासु ने बताया कि 2025-26 में रेवेन्यू डेफिसिट बढ़ने का कारण जीएसटी दरों में कटौती, सेंट्रली स्पॉन्सर्ड स्कीम्स के तहत फंड्स रोकना और तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड के लॉस फंडिंग पर बढ़े खर्च थे। उन्होंने कहा कि इन फिस्कल चुनौतियों के बिना शुरुआती अनुमानों के अनुसार घाटे को नियंत्रित किया जा सकता था।

2026-27 के लिए फिस्कल डेफिसिट 1.21 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जो 2025-26 के रिवाइज्ड एस्टिमेट्स में 1.24 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा कम है। जीएसडीपी के प्रतिशत के रूप में यह 3.48 प्रतिशत से घटकर 3 प्रतिशत होने का अनुमान है, जो फिस्कल कंसोलिडेशन को दर्शाता है। मंत्री ने कहा कि यदि केंद्र ने वर्तमान वित्तीय वर्ष में अधिक सहयोग दिया होता तो राज्य की वित्तीय स्थिति और मजबूत हो सकती थी।