‘द केरल स्टोरी 2’ पर जुबानी जंग तेज, भाजपा बोली- फिल्म ने समाज को दिया रियलिटी चेक

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नई दिल्ली, 20 फरवरी (आईएएनएस)। फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड’ को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। ट्रेलर रिलीज के बाद से ही यह फिल्म विवादों में है और अब अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं के बयान भी सामने आ रहे हैं। कांग्रेस, भाजपा और झारखंड सरकार के नेताओं के बीच इस मुद्दे पर तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है, जबकि मामला अदालत में है।

भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने इस फिल्म का खुलकर बचाव किया है। उन्होंने कहा, ”केरल में जो कुछ भी हो रहा है, वह बेहद शर्मनाक है। चाहे कांग्रेस की सरकार रही हो या लेफ्ट फ्रंट की, राज्य में कुछ कट्टरपंथी मुस्लिम समूहों द्वारा हिंदू और ईसाई लड़कियों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सालों से सामने आती रही हैं। यह सिर्फ धर्म परिवर्तन का मामला नहीं है, बल्कि एक सिस्टमैटिक क्राइम है, जो कथित तौर पर संगठित तरीके से और विदेशी फंडिंग के सहारे चल रहा है।”

उन्होंने दावा किया कि न केवल हिंदू बल्कि ईसाई लड़कियों को भी इन समूहों ने टारगेट किया है। ‘द केरल स्टोरी’ ने समाज को एक रियलिटी चेक दिया है, और यही वजह है कि कुछ लोगों को यह फिल्म चुभ रही है।

वहीं, फिल्म को लेकर कांग्रेस नेता उदित राज ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए सरकार और समाज दोनों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि अगर सरकारी पैसों से ‘केरल स्टोरी’, ‘बंगाल फाइल्स’ या ‘द कश्मीर फाइल्स’ जैसी फिल्में बनती हैं तो इससे उन्हें कोई खास फर्क नहीं पड़ता। 100-200 करोड़ रुपए सरकार के लिए कोई बड़ी रकम नहीं है, क्योंकि जिन लोगों के पास लाखों-करोड़ों की संपत्तियां हैं, उनके लिए यह ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ जैसा है।

उन्होंने आगे कहा, “अगर समाज में अंतरजातीय शादियों को बढ़ावा दिया जाए तो अपने आप ही लव जिहाद और धर्मांतरण जैसे मुद्दे कमजोर पड़ जाएंगे। इससे जातिगत भेदभाव खत्म होगा।”

उदित राज ने हाल ही में जारी यूजीसी गाइडलाइंस का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे कदम भी धर्मांतरण को बढ़ावा देते हैं। जब तक समाज के भीतर मौजूद मूल कारण खत्म नहीं होंगे, तब तक इन समस्याओं का स्थायी समाधान संभव नहीं है।

इस विवाद में झारखंड सरकार भी कूद पड़ी। रांची से झारखंड के मंत्री इरफान अंसारी ने फिल्म को बैन करने की मांग की। उन्होंने कहा, ”फिल्म में अनाप-शनाप चीजें दिखाई जा रही हैं, और अगर यह झारखंड में रिलीज होती है, तो स्थिति ठीक नहीं होगी। सेंसर बोर्ड बिना जिम्मेदारी के फिल्मों को पास कर रहा है। सरकार और समाज दोनों को ऐसी फिल्मों का विरोध करना चाहिए, और ‘द केरल स्टोरी 2’ को पूरी तरह बैन किया जाना चाहिए।”

इन बयानों के बीच मामला कानूनी मोड़ ले चुका है। फिल्म के सेंसर सर्टिफिकेट को रद्द करने की मांग को लेकर केरल हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि फिल्म बिना ठोस सबूत के केरल और वहां के लोगों की छवि को नुकसान पहुंचाती है और राज्य को नकारात्मक रूप में दिखाती है।

हाईकोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए सेंसर बोर्ड और फिल्म के निर्माताओं को नोटिस जारी किया है।