उमर अब्दुल्ला की ‘असंसदीय टिप्पणी’ पर भाजपा विधायकों ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा की कार्यवाही बाधित की

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श्रीनगर, 11 फरवरी (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों ने बुधवार को सदन की कार्यवाही में बाधा डाली। उन्होंने सीएम उमर अब्दुल्ला से माफी मांगने की मांग करते हुए सदन के वेल में प्रवेश किया। उनका आरोप था कि मुख्यमंत्री ने गलत बयान दिए थे।

हंगामा करने से पहले भाजपा विधायक सदन से वॉकआउट कर गए थे। बाद में प्रश्नकाल खत्म होने पर वे वापस आए। उन्होंने कहा कि जब वे वापस आए तो मुख्यमंत्री पहले ही सदन छोड़ चुके थे। इसके बाद भाजपा के विधायक लाइन में खड़े होकर सरकार के खिलाफ नारे लगाते रहे।

हालांकि, स्पीकर ने कहा कि सदन से वॉकआउट करने के बाद यह मुद्दा फिर से उठाया नहीं जा सकता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भाजपा के विरोध को सदन की आधिकारिक कार्यवाही में रिकॉर्ड नहीं किया जाएगा।

इसके बावजूद, भाजपा के विधायक सदन के वेल में आए और वहां धरना दिया। इससे पहले भी प्रश्नकाल शुरू होने से पहले भाजपा के शाम लाल शर्मा ने खड़े होकर मुख्यमंत्री से माफी मांगने की अपील की और शोर-शराबा किया।

भाजपा विधायक शाम लाल शर्मा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा के इतिहास में ऐसी घटना की कोई मिसाल नहीं है। उन्होंने कहा, “चीफ मिनिस्टर ने जो भाषा इस्तेमाल की, वह किसी भी पार्लियामेंट में स्वीकार्य नहीं है। मैं हाउस के लीडर से पूछना चाहता हूं कि क्या वे कल हाउस में भाजपा विधानमंडल दल के बारे में इस्तेमाल किए गए शब्दों को वापस लेते हैं। अगर वे इसे वापस नहीं लेते तो हम इसे उनकी अंतरात्मा पर छोड़ते हैं कि उनकी अंदर की आवाज उन्हें क्या बताती है कि यह हाउस में इस्तेमाल किया गया शब्द सही था या नहीं। अगर चीफ मिनिस्टर यहां मौजूद नहीं हैं तो मैं जवाब देने का काम चेयर पर छोड़ता हूं। इस मामले पर कुछ कहना उनकी जिम्मेदारी है।”

स्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने भाजपा सदस्यों को शांत रहने और प्रश्नकाल चलाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि जब हाउस के लीडर फ्लोर पर हों तब ही यह मुद्दा उठाया जा सकता है। स्पीकर ने कहा, “मंगलवार को जो हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण था। चीफ मिनिस्टर को आने दें और यदि वे चाहें तो बयान दे सकते हैं। मैं उनकी तरफ से बयान नहीं दे सकता।”

हेल्थ मिनिस्टर सकीना इटू ने भाजपा सदस्यों पर भी अनसंसदीय शब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया, खासकर डिप्टी चीफ मिनिस्टर सुरिंदर चौधरी के खिलाफ और कहा कि सदन में झूठ भी बोला गया।

सुरिंदर चौधरी ने स्पीकर को सुझाव दिया कि दोनों पक्षों द्वारा इस्तेमाल किए गए सभी अनसंसदीय शब्दों की जांच की जाए और उन्हें रिकॉर्ड से हटा दिया जाए, ताकि कार्यवाही बिना किसी रुकावट के जारी रह सके।

विपक्ष के नेता और भाजपा विधायक सुनील शर्मा ने स्पीकर द्वारा दिए गए सुझाव का विरोध किया और अपनी बात बदलने से मना कर दिया। इसके बाद उन्होंने सदन में नारे लगाते हुए वॉकआउट का नेतृत्व किया।

यह हंगामा कल हुआ था, जब मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के भाषण के दौरान भाजपा विधायक उनकी कुछ बातों पर आपत्ति जताने और माफी मांगने के लिए उठ खड़े हुए। उमर अब्दुल्ला 6 फरवरी को पेश किए गए केंद्र शासित प्रदेश के बजट पर चर्चा समाप्त कर रहे थे, तभी भाजपा के सदस्यों ने उनकी कुछ बातों को ‘गैर-संसदीय’ करार दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह अपने शब्द वापस लेने को तैयार थे, लेकिन बार-बार होने वाली व्यवधान के कारण उन्हें बोलने का मौका नहीं मिला। शाम लाल शर्मा ने कहा कि पार्टी तब तक सदन की कार्यवाही नहीं चलने देगी जब तक मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला बिना शर्त माफी नहीं मांगते।