नई दिल्ली, 19 मार्च (आईएएनएस)। ऑस्ट्रेलिया महिला क्रिकेट टीम की उप-कप्तान एशले गार्डनर अपने करियर की शुरुआत वाले उस निडर अंदाज को फिर से अपना रही हैं, जिसने उन्हें पहचान दिलाई थी।
ऑस्ट्रेलियाई टीम इंग्लैंड में होने वाले आईसीसी विमेंस टी20 विश्व कप 2026 की तैयारी कर रही है। यह ऑलराउंडर इस बड़े टूर्नामेंट से पहले अपनी बेहतरीन फॉर्म हासिल करने का लक्ष्य बना रही हैं। गार्डनर 100 टी20 इंटरनेशनल मैच पूरे करने से महज एक कदम दूर हैं।
ऑस्ट्रेलियाई टीम जब सेंट विंसेंट में वेस्टइंडीज का सामना करेगी, तो गार्डनर टी20 मैचों का शतक लगाने वाली सातवीं ऑस्ट्रेलियाई महिला खिलाड़ी बन जाएंगी। इस बीच टीम हाल ही में सेमीफाइनल में मिली निराशाओं को पीछे छोड़ने के लिए बेताब होगी। ऑस्ट्रेलियाई टीम को आईसीसी विमेंस वर्ल्ड कप 2025 में मेजबान भारत से मिली हार मिली थी, जबकि उसे विमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2024 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ इसी तरह टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा था।
गार्डनर ने क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से कहा, “मैं पहले ऐसी खिलाड़ी थी जिसे कोई डर नहीं लगता था। लेकिन मुझे लगता है कि जैसे-जैसे मैं बड़ी और ज्यादा समझदार होती गई, जिंदगी और आमतौर पर क्रिकेट के प्रति मेरे नजरिए में थोड़ा डर भी शामिल हो गया है।”
उन्होंने आगे कहा, “मैं उस निडरता को थोड़ा फिर से जगाने की कोशिश कर रही हूं। ऐसा नहीं कि मैं हद पार करके पूरी तरह से लापरवाह हो जाऊं। लेकिन मैं जिस तरह का क्रिकेट खेलती हूं, उसमें मैं हमेशा खेल पर हावी होने की कोशिश करती हूं। इसलिए जब मैं दबाव में होती हूं, तो मैं सचमुच उस निडरता को जगाने और उसका इस्तेमाल करने की कोशिश करती हूं। तभी मैं अपना सबसे बेहतरीन क्रिकेट खेल पाती हूं।”
28 वर्षीय खिलाड़ी ने ऑस्ट्रेलिया के लिए मिडिल-ऑर्डर में खेलते हुए टी20 फॉर्मेट में औसतन 25.11 रन बनाए हैं। उन्होंने कहा, “इस फॉर्मेट में, मिडिल-ऑर्डर में मेरी भूमिका कभी-कभी काफी चुनौतीपूर्ण हो जाती है। हो सकता है कि आप तब बल्लेबाजी करने आएं जब टीम मजबूत स्थिति में हो, या फिर तब जब हम मुश्किल में हों। इसमें हालात को बहुत तेजी से समझना होता है, और अपनी लय को बहुत जल्दी हासिल करना होता है। शायद यह एक ऐसी चीज है जिसे मैं इस फॉर्मेट में लंबे समय से लगातार बहुत अच्छे से नहीं कर पा रही थी।”
गार्डनर आगामी वेस्टइंडीज सीरीज को वर्ल्ड कप की आखिरी तैयारी के तौर पर देख रही हैं, और इसकी तुलना 2017 वर्ल्ड कप के बाद टीम में आए बड़े बदलावों वाले दौर से कर रही हैं।
उन्होंने कहा, “अगर मैं 2017 के उस वर्ल्ड कप को याद करूं जो हम हार गए थे, तो हम बहुत ही संकोच के साथ खेल रहे थे। फिर हमारे खेल में एक बदलाव आया, हमने सोचा कि ‘चलो अब खुलकर खेलते हैं, बिना किसी डर के खेलते हैं’। तब से हमने इसी सोच को अपना लिया है। अब तो यह टीम का एक ऐसा अलिखित नियम बन गया है कि जब भी कोई नया खिलाड़ी टीम में आता है, तो उसे इसी अंदाज में क्रिकेट खेलना होता है।”

