नई दिल्ली, 20 मार्च (आईएएनएस)। चैत्र नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही मां जगदम्बा के नौ रूपों की पूजा देश के हर देवी मंदिर में शुरू हो जाती है।
हर दिन मां को उनके अलग-अलग रूपों के साथ पूजा जाता है। 21 मार्च को मां के तीसरे रूप मां चंद्रघंटा की पूजा होती है, जो सौम्यता, शांति, सौभाग्य और कल्याण का प्रतीक मानी जाती है। अगर आप मां के तीसरे रूप के विशेष दर्शन करना चाहते हैं, तो उत्तर प्रदेश की धरती पर मां के दो भव्य मंदिर स्थापित हैं, जहां नवरात्रि के तीन बड़े अनुष्ठान होते हैं।
उत्तर प्रदेश के प्रयाग में चौक क्षेत्र पर मां चंद्रघंटा को समर्पित मंदिर मौजूद है, जहां नवरात्रि के तीसरे दिन भव्य पूजा और अनुष्ठान किए जाते हैं। यह मंदिर ‘मां क्षेमा माई’ के नाम से प्रसिद्ध है। माना जाता है कि मंदिर में मौजूद मां दुर्गा का रूप देवी चंद्रघंटा का ही है। यहां आने वाले भक्त मां से शारीरिक और मानसिक रोगों से मुक्ति की कामना करते हैं। खास बात यह है कि मंदिर सिद्धपीठ मंदिरों में शामिल है।
गर्भगृह में मौजूद मां के माथे पर अर्धचंद्र मौजूद है और सिर्फ मां के मुख के ही दर्शन का सौभाग्य मिलता है। नवरात्रि के तीसरे दिन मंदिर में भारी भीड़ पहुंचती है। नवरात्रि के तीसरे दिन यहां मां को विशेषकर सेब का भोग लगाया जाता है। माना जाता है कि चंद्रघंटा को सेब अतिप्रिय है।
दूसरा मंदिर वाराणासी में मौजूद है। बनारस की तंग और भीड़ से भरी गलियों के बीच मां चंद्रघंटा का प्राचीन मंदिर मौजूद है। यहां मंदिर चौक क्षेत्र की चंद्रघंटा वाली गली में स्थापित है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत है कि यहां दर्शन करने से मां के नौ रूपों के दर्शन का पुण्य मिलता है। हालांकि मंदिर में स्थापित मां जगदम्बा को मां चंद्रघंटा का रूप ही माना जाता है। नवरात्रि के तीसरे दिन मां को दूध और दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगता है और पीले फूल अर्पित किए जाते हैं। यहां दर्शन करने वाले भक्तों को मां सुख और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

