उत्तरकाशी, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। उत्तराखंड के उत्तरकाशी में चारधाम यात्रा-2026 को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से प्रशासन ने मानव तस्करी, बाल तस्करी, बाल श्रम और भिक्षावृत्ति जैसी संवेदनशील समस्याओं पर सख्त रुख अपनाया है। इसी क्रम में शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक कमलेश उपाध्याय की अध्यक्षता में विभिन्न विभागों के साथ एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक आयोजित की गई।
बैठक में इन अपराधों की रोकथाम के लिए ठोस और प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक के दौरान पुलिस अधीक्षक ने कहा कि चारधाम यात्रा के दौरान बाहरी राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और अन्य लोगों का आगमन होता है, जिससे मानव तस्करी और बाल शोषण जैसी गतिविधियों के बढ़ने की आशंका रहती है। उन्होंने सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे आपसी समन्वय के साथ कार्य करें, संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखें, और संदिग्ध व्यक्तियों का नियमित सत्यापन सुनिश्चित करें।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ह्यूमन और चाइल्ड ट्रैफिकिंग जैसे अपराधों की रोकथाम केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज और अन्य संबंधित विभागों की भी बराबर भागीदारी जरूरी है। आमजन को जागरूक करने, संदिग्ध गतिविधियों की समय पर सूचना देने और पीड़ितों की सहायता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए।
इस बैठक में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के प्रभारी प्रमोद उनियाल, निरीक्षक टीकम सिंह बिष्ट, उपनिरीक्षक गीता, महिला एवं बाल कल्याण, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई, श्रम विभाग, बाल एवं किशोर न्याय बोर्ड और चाइल्ड हेल्पलाइन से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भाग लिया। सभी विभागों ने अपने-अपने स्तर पर किए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की और संयुक्त रणनीति के तहत समन्वित कार्रवाई करने पर सहमति जताई।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि चारधाम यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह पहल यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

