वीडियोकॉन मॉजाम्बिक ऑयल डील मामले में ईडी ने 13 आरोपियों के खिलाफ दायर की अभियोजन शिकायत

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नई दिल्ली, 16 फरवरी (आईएएनएस)। ईडी ऑफिस ने 18 दिसंबर 2024 को वीडियोकॉन मॉजाम्बिक ऑयल डील मामले में वी. एन. धूत और 12 अन्य आरोपियों/कंपनियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम, 2002 के तहत अभियोजन शिकायत दायर की है। विशेष अदालत, राउज एवेन्यू, नई दिल्ली ने 10 फरवरी 2026 को मामले में संज्ञान लिया और सभी 13 आरोपियों को नोटिस जारी किए।

सीबीआई ने प्रारंभिक जांच के बाद 23 जून 2020 को एफआईआर दर्ज की थी। इस एफआईआर में आईपीसी की धारा 120-बी और 420 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) रीडब्ल्यू 13(1)(डी) के तहत वी. एन. धूत, अज्ञात बैंक अधिकारियों और अन्य के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक कदाचार के आरोप लगाए गए।

ईडी ने पाया कि वीडियोकॉन समूह ने विदेशी मुद्रा ऋण का इस्तेमाल उनके तय किए गए उद्देश्यों यानी विदेश में तेल और गैस परियोजनाओं के विकास और पुनर्वित्त के बजाय अन्य गैर-तेल व्यवसायों और निजी संपत्ति बनाने में किया। कर्ज की गई राशि पहले वीडियोकॉन हाइड्रोकार्बन होल्डिंग्स लिमिटेड और उसकी विदेशी सहायक कंपनियों के जरिए भेजी गई और फिर जटिल तरीके से विदेशी वीडियोकॉन समूह की कंपनियों के माध्यम से भारत लौटाई गई।

फंड को सर्कुलर ट्रांजैक्शन, एक्सपोर्ट एडवांस, इंटर-कंपनी लोन और निवेश के जरिए भारत लौटाया गया। इसे गैर-तेल व्यवसायों, निवेश और निजी/कॉर्पोरेट संपत्ति बनाने में इस्तेमाल किया गया।

बड़े हिस्से को भारत में वीआईएल और उसकी समूह कंपनियों के खाते और बही-खातों में फिर से डाला गया। फंड के वास्तविक उपयोग को छुपाने और बैंकिंग सुविधा जारी रखने के लिए गलत और भ्रामक प्रमाण पत्र बैंक को दिए गए।

जांच में यह भी पता चला कि कुल यूएसडी 4.54 बिलियन की सुविधा में से यूएसडी 2.02 बिलियन को गैर-निर्धारित उद्देश्यों के लिए मोड़ा गया। 2018 में वीआईएल और उसकी समूह कंपनियों के खाते एनपीए में बदल गए। एसबीएलसी सुविधा के लिए बैंकों का कुल दावा 61,773.02 करोड़ रुपए था, जिसमें 23,647.12 करोड़ रुपए की एनपीए शामिल थी।

ईडी ने इस मामले में दो अस्थायी जब्ती आदेश जारी किए, जिनमें 17.69 करोड़ और 38.58 करोड़ रुपए की संपत्ति शामिल है। ईडी ने कुल 1,136.49 करोड़ रुपए के अपराध लाभ के खिलाफ अभियोजन शिकायत दायर की है।

यह मामला वीडियोकॉन समूह द्वारा विदेशी कर्ज का गलत और गैरकानूनी उपयोग करने का गंभीर मामला है, जिससे भारतीय बैंकिंग प्रणाली को भारी नुकसान पहुंचा।