पश्चिम एशिया संकट पर प्रियंका चतुर्वेदी ने सरकार को घेरा, कहा- देश ऊर्जा सुरक्षा को लेकर तैयार नहीं

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नई दिल्ली, 12 मार्च (आईएएनएस)। शिवसेना यूबीटी की राज्यसभा सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने कई अहम मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित महाभियोग, पश्चिम एशिया के हालात, गैस संकट, गृह मंत्री अमित शाह के बयान और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की भूमिका को लेकर सवाल उठाए।

प्रियंका चतुर्वेदी ने आईएएनएस से कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। चुनाव प्रक्रिया, ईवीएम और मतदाता सूचियों से जुड़े मुद्दों पर लगातार संदेह जताया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “ज्ञानेश कुमार को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं, चाहे वह चुनाव की प्रक्रिया हो, ईवीएम का मुद्दा हो या फिर एसआईआर के तहत मतदाता सूचियों में हो रही कटौती। जिस तरह से वोटर लिस्ट में नाम हटाए जा रहे हैं और खासतौर पर उन इलाकों में ऐसा हो रहा है जहां विपक्ष मजबूत है, यह सिर्फ पश्चिम बंगाल की लड़ाई नहीं है। यह पूरे देश में मतदाताओं के अधिकारों की लड़ाई है।”

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान को पूरी तरह स्वतंत्र और किसी भी प्रकार के प्रभाव से मुक्त होना चाहिए। पश्चिम एशिया में जारी तनाव को लेकर केंद्र सरकार पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि सरकार की तैयारी कमजोर दिखाई दे रही है। संकट के शुरुआती संकेत मिलते ही देश में एलपीजी के दाम बढ़ा दिए गए और गैस पर नियंत्रण के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम जैसे कदम उठाए गए।

उन्होंने कहा, “पहले ही सप्ताह में एलपीजी की कीमतें बढ़ा दी गईं और गैस पर नियंत्रण के लिए कानून लागू कर दिया गया। अब देश में गैस की राशनिंग जैसा माहौल बन गया है, जहां घरेलू और कमर्शियल इस्तेमाल के बीच फर्क किया जा रहा है।” शिवसेना सांसद ने कहा कि गैस संकट का असर उद्योगों पर साफ दिखाई दे रहा है। कई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, खासकर टाइल्स उद्योग और अन्य गैस पर निर्भर फैक्ट्रियां प्रभावित हो रही हैं।

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, “ऐसी कई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं जिन्हें गैस की जरूरत होती है, लेकिन अब वे लगभग ठप हो गई हैं। होटल और रेस्तरां मालिक भी नोटिस जारी कर रहे हैं कि अगर यही स्थिति जारी रही तो उन्हें अपने प्रतिष्ठान बंद करने पड़ेंगे। इसका सबसे ज्यादा असर आम जनता पर पड़ेगा।”

उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे पर भी सरकार की आलोचना की और कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है और मौजूदा संकट ने दिखा दिया है कि देश इस स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार नहीं था।

उन्होंने आरोप लगाया कि रूस से तेल खरीदने जैसे फैसलों में भी भारत पर अमेरिका के रुख का प्रभाव दिखता है। जब अमेरिका कोई फैसला लेता है, तभी भारत भी उसी दिशा में कदम उठाता है। यह स्थिति दिखाती है कि हमारी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर पर्याप्त तैयारी नहीं थी।

उन्होंने कहा कि सरकार ने दावा किया था कि देश के पास लगभग 72 दिनों का ऊर्जा भंडार मौजूद है लेकिन संकट के पहले ही सप्ताह में कमी दिखाई देने लगी।

उन्होंने संसद की कार्यवाही और लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाए। चतुर्वेदी ने कहा कि हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में सांसदों को निलंबित किया गया और उसी दौरान कई अहम कानून पारित किए गए। उन्होंने कहा, “हमने देखा कि बड़ी संख्या में सांसदों को सस्पेंड किया गया और उसी दौरान कई महत्वपूर्ण कानून पारित किए गए, जिनमें नए आपराधिक कानून भी शामिल हैं। जब विपक्ष सदन के बाहर था, तब ये कानून पास किए गए।”

उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी का राजनीतिकरण किया जा रहा है। यह किसी एक व्यक्ति की बात नहीं है बल्कि उस व्यवस्था की बात है जिसमें निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।