नई दिल्ली, 10 मार्च (आईएएनएस)। भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने यूएई के राजदूत के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक फोन कॉल से इजरायल और ईरान के बीच युद्ध खत्म हो जाएगा।
प्रतुल शाह देव ने मंगलवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अपने बयान में काफी पहले ही इस बात को स्पष्ट कर चुके हैं कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं होता है। दोनों पक्षों को सामने आकर आकर संवाद पर जोर देते हुए युद्ध के रास्ते का परित्याग करना होगा, तभी जाकर आगे स्थिति सकारात्मक होगी, क्योंकि हमारी तरफ से काफी पहले ही इस बात को स्पष्ट किया जा चुका है कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं होता है। अगर हम चाहते हैं कि युद्ध पर विराम लगे, तो इसके लिए हमें संवाद पर जोर देना होगा।
उन्होंने कहा कि जब कभी भी दो देशों के बीच युद्ध होता है, तो इससे दोनों देशों के नागरिकों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है। इससे दोनों देशों को धक्का पहुंचता है। इसी को देखते हुए भारत सरकार ने दोनों देशों से अपील की है कि युद्ध का रास्ता छोड़कर संवाद का मार्ग अपनाएं। इसी से आगे चलकर स्थिति सकारात्मक होने की संभावना प्रबल होगी, नहीं तो आगे चलकर स्थिति बिगड़ सकती है।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि अभी हमारी प्राथमिकता युद्धग्रस्त क्षेत्रों में रह रहे अपने भारतीय नागरिकों को सकुशल वापस लाना होना है। हम इस दिशा में काम कर रहे हैं। हमने इस संबंध में पूरी रूपरेखा तैयार कर ली है, जिसके आधार पर हम मौजूदा समय में काम कर रहे हैं। उस दिशा में हम किसी भी प्रकार की कोताही स्वीकार नहीं कर रहे हैं। अब तक हम कई भारतीयों को नागरिकों को निकाल भी चुके हैं।
इसके अलावा, उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने दिल्ली में आयोजित एआई समिट के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से किए गए अमर्यादित विरोध प्रदर्शन की सराहना की थी। उन्होंने राहुल गांधी के बयान के संदर्भ में कहा कि उन्होंने अपनी सारी नैतिकता पार कर ली है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित एआई समिट सम्मेलन में दुनियाभर के कई दिग्गज शामिल हुए थे। इस समिट की मेजबानी हमने की थी। ऐसी स्थिति में कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं की ओर से किया गया यह अशोभनीय व्यवहार बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है। दुख की बात यह है कि अब ये लोग इस घटना की तुलना महात्मा गांधी से कर रहे हैं, कह रहे हैं कि महात्मा गांधी भी कपड़े नहीं पहनते थे। क्या इन लोगों को ऐसा कहते हुए शर्म नहीं आ रही है? अगर कांग्रेस इसी तरह से नैतिकता को समाप्त करेगी, तो अब हम नहीं, बल्कि देश की जनता सामने आकर इनकी धुलाई करेगी।

