जेएनयू में हुए कृत्य को देशद्रोह की तरह देखा जाना चाहिए: विश्वास सारंग

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भोपाल, 6 जनवरी (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने दिल्ली के जेएनयू कैंपस में सोमवार रात लगे नारों की जमकर आलोचना की है। ये नारे दिल्ली दंगों में शामिल शरजील इमाम और उमर खालिद की जमानत याचिका खारिज होने के विरोध में लगाए गए थे। सारंग ने इस कृत्य को देशद्रोह बताते हुए विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए।

विश्वास सारंग ने कहा कि जेएनयू में जो हुआ, उससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण और कुछ नहीं हो सकता। उनका कहना है कि यह देशद्रोह है और इसे सिर्फ छात्रों की मानसिकता तक सीमित नहीं किया जा सकता। उन्होंने राहुल गांधी पर भी आरोप लगाया कि उनकी विदेश यात्रा और बयान इस मानसिकता को बढ़ावा देते हैं और भारत के मान-सम्मान पर चोट पहुंचाते हैं।

सारंग ने यह भी कहा कि यह मानसिकता तब और पनपती है जब विपक्षी नेता एयर स्ट्राइक, सर्जिकल स्ट्राइक या ऑपरेशन सिंदूर जैसे मुद्दों पर सवाल उठाते हैं। उनका कहना है कि जब संवैधानिक व्यवस्थाओं या चुनाव आयोग पर भी प्रश्न खड़े किए जाते हैं, तो यही मानसिकता और बढ़ती है। सारंग ने इसे बेहद आपत्तिजनक और अस्वीकार्य बताया।

उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के खिलाफ ऐसी बातें करना और गाली देना हमारे देश के संस्कारों में नहीं है, लेकिन राहुल गांधी जब विदेश में मंच से भारत की आलोचना करते हैं तो ऐसी मानसिकता को बढ़ावा मिलता है। जेएनयू में सोमवार रात जो भी हुआ वह इसी का नतीजा है और इसे देशद्रोह के रूप में देखा जाना चाहिए।

मध्य प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के कार्यक्रम पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह गांव-गांव घूम रहे हैं। यह पूरी तरह से कांग्रेस का अपना मामला और रणनीति है। हर भारतीय नागरिक कहीं भी जा सकता है, लेकिन इसका कोई खास फायदा होने वाला नहीं है। उन्होंने एक कहावत से तंज कसते हुए कहा, “जहां-जहां पांव पड़े संतन के, तहां-तहां बंटाधार।”