नई दिल्ली, 6 जनवरी (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने जेएनयू में पीएम मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ लगाए गए विवादित नारों पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि इस तरह के नारे नहीं लगने चाहिए, चाहे जेएनयू हो या फिर कोई दूसरा विश्वविद्यालय।
नई दिल्ली में आईएएनएस से बातचीत में शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि जेएनयू में जो छात्रों के द्वारा नारे लगाए गए, मैं इसकी निंदा करती हूं। ऐसे नारे कहीं भी नहीं लगने चाहिए, चाहे जेएनयू के अंदर हों, जेएनयू के बाहर हों या देश के किसी भी कोने में। इस तरह के नारों की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह नहीं भूलना चाहिए कि नरेंद्र मोदी देश के चुने हुए प्रधानमंत्री हैं। वे चुनाव के आधार पर आए हैं। आपका मतभेद हो सकता है और इस आधार पर आप अपने विचार रख सकते हैं, लेकिन विवादित टिप्पणियां या नारे लगाना ठीक नहीं है। इससे आपके ही मुद्दे कमजोर होते हैं। विपक्ष में रहकर हम अपनी आवाज बुलंदी से उठा सकते हैं। हमें संयम दिखाते हुए अपने मुद्दे उठाने चाहिए।
एसआईआर को लेकर सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि एसआईआर चुनाव आयोग का एक जरूरी टूल है और वोटरों को इसमें सहयोग करना चाहिए। लेकिन, एसआईआर की आड़ में चुनाव आयोग ने इसे एक राजनीतिक एजेंडा बना दिया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि विपक्ष को वोट देने वाले लोगों के नाम कैसे हटाए जाए।
उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का जिक्र करते हुए कहा कि चुनाव सुधार की बात चल रही थी, तब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि घुसपैठिए निर्णय लेते हैं कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा। वे लोगों के दिमाग में यह बात डाल रहे थे कि विपक्ष को वोट देने वाले सभी घुसपैठिए हैं। इसी के चलते चुनाव आयोग काम कर रहा है, जो विपक्ष को वोट देता है, उसका नाम काट लिया जाए। चुनाव आयोग देश की जिम्मेदारी के अनुसार नहीं, बल्कि भाजपा की जिम्मेदारी के अनुसार कार्य कर रहा है।
एक किताब के लॉन्च पर सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि जिस तरह से उन्होंने यह किताब लिखी है, खासकर महिला वोटरों पर फोकस करते हुए-वह बहुत प्रभावशाली है। हम सब बात करते हैं कि महिलाएं बड़ी संख्या में वोट कर रही हैं। बिहार में, महाराष्ट्र में, लेकिन वे यह पता लगाती हैं कि वे क्या सोच रही हैं और उन्हें बाहर जाकर वोट करने के लिए क्या प्रेरित करता है। महिलाओं को भी मौका मिलना चाहिए, जिससे वे भी ज्यादा से ज्यादा संख्या में चुनाव में हिस्सा ले पाएं।

