केरल सीएम विजयन ने राज्यपाल पर नीति भाषण में हिस्सा छोड़ने का आरोप लगाया

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तिरुवनंतपुरम, 20 जनवरी (आईएएनएस)। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने राज्यपाल द्वारा नीति भाषण में कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों को न पढ़े जाने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने सरकार द्वारा तैयार किए गए भाषण के कई हिस्सों को छोड़ दिया, जिससे राज्य की प्रमुख चिंताओं और उपलब्धियों को जनता के सामने रखने का मौका नहीं मिला।

इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर राज्य को वित्तीय रूप से दबाने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि केरल की कई उपलब्धियों के बावजूद केंद्र की गलत नीतियों और कार्रवाइयों से राज्य को भारी वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है। इससे संघीय ढांचे और वित्तीय संघवाद के संवैधानिक सिद्धांत कमजोर हो रहे हैं।

वर्तमान वित्तीय वर्ष की आखिरी तिमाही यानी जनवरी से मार्च 2026 तक राज्य को खर्च की प्रतिबद्धताएं पूरी करने के लिए करीब 12,000 करोड़ रुपए मिलने चाहिए थे, लेकिन केंद्र ने इस राशि के आधे से ज्यादा हिस्से में कटौती कर दी। विशेष रूप से 5,944 करोड़ रुपए बिना किसी ठोस वजह के देने से इनकार कर दिया गया।

इसके अलावा, केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत सितंबर 2025 तक का बकाया, जिसमें पिछले वर्षों का भी शामिल है, 5,650 करोड़ रुपए से ज्यादा है। इन कटौतियों और देरी से राज्य के वित्त पर बहुत दबाव पड़ा है, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

ये वित्तीय मुश्किलें राज्य के सभी वर्गों को प्रभावित कर रही हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, कल्याण योजनाओं, कृषि और रोजगार जैसे क्षेत्रों में खर्च पर रोक लग रही है। मुख्यमंत्री ने केंद्र द्वारा शक्तियों के अत्यधिक केंद्रीकरण और राज्य के अधिकार क्षेत्र में बढ़ते हस्तक्षेप की भी आलोचना की। राज्य विधानसभा द्वारा पारित कई विधेयक लंबे समय से लंबित पड़े हैं। केरल सरकार ने इन मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है और मामला अब संविधान पीठ के पास है।

केरल ने जनसंख्या नियंत्रण समेत सामाजिक और जनसांख्यिकीय क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है, लेकिन कर हस्तांतरण में इसका हिस्सा लगातार घट रहा है। दसवें वित्त आयोग के समय यह 3.87 प्रतिशत था, जो पंद्रहवें वित्त आयोग में घटकर 1.92 प्रतिशत रह गया। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि कर हस्तांतरण और वित्त आयोग अनुदान राज्य का संवैधानिक अधिकार है, कोई दान नहीं। इन पर किसी भी तरह का दबाव या बदलाव संघीय सिद्धांतों को कमजोर करता है।