कोलकाता, 6 जनवरी (आईएएनएस)। आरजी कर रेप-मर्डर केस में न्याय की मांग करने वाले जूनियर डॉक्टर अनिकेत महतो ने पिछले हफ्ते सीनियर रेजिडेंट पद से हटने के अपने फैसले की घोषणा की थी, जिसके बाद अब उन्होंने 30 लाख रुपए के सरकारी बॉन्ड को चुकाने के लिए लोगों से आर्थिक मदद मांगी है।
महतो ने सोमवार रात को सोशल मीडिया पर एक क्यूआर कोड शेयर किया। इससे पहले उन्होंने सीनियर रेजिडेंस से इस्तीफा दे दिया था।
इस क्यूआर कोड में उनका बैंक अकाउंट नंबर है। यह पता चला है कि डॉ. अनिकेत महतो ने साउथ इंडियन बैंक की सॉल्ट लेक ब्रांच के अपने बैंक अकाउंट को पब्लिक किया है। नियमों के अनुसार, सरकारी सीनियर रेजिडेंसी एक बॉन्डेड पोस्ट होती है। अगर कोई इसे छोड़ता है, तो सरकार को कुछ रकम चुकानी पड़ती है।
अनिकेत ने मीडिया से कहा, “मैंने राज्य सरकार के बॉन्ड के तहत सीनियर रेजिडेंट के पद से इस्तीफा दे दिया है। मेरे प्रेरणा स्रोत विद्यासागर, विवेकानंद, रवींद्रनाथ और शरत चंद्र हैं। जैसा कि आप जानते हैं, बॉन्ड की शर्तों के अनुसार, मुझे सरकार को 30 लाख रुपए देने हैं। यह वित्तीय बोझ मेरी हैसियत से बाहर है। मुझे उम्मीद है कि आप मुझे आर्थिक मदद देंगे।”
अनिकेत महतो ने सोमवार को राज्य के स्वास्थ्य सचिव, स्वास्थ्य शिक्षा निदेशक और स्वास्थ्य सेवा निदेशक को एक पत्र भेजा। पत्र में उन्होंने लिखा, “मुझे समय पर सही अपॉइंटमेंट नहीं दिया गया। इसके कारण मेरा कीमती पढ़ाई का समय बर्बाद हो गया है, जिसकी भरपाई नहीं हो सकती। मुझे बहुत ज्यादा मानसिक परेशानी हुई है। अब मैं सीनियर रेजिडेंट के पद पर काम नहीं करना चाहता।”
राज्य स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में छात्र असल में टैक्सपेयर्स के पैसे से पढ़ाई करते हैं। इसीलिए जिलों में सेवा देना उनकी जिम्मेदारी है। अगर इसे पूरा नहीं किया जाता है, तो मुआवजे का प्रावधान है। पता चला है कि जब तक डॉ. अनिकेत महतो 30 लाख रुपए का बॉन्ड नहीं चुकाते, तब तक उन्हें स्वास्थ्य विभाग से ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (एनओसी) या क्लीयरेंस नहीं मिलेगा। इस बीच, रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने इस मुद्दे पर एक मीटिंग बुलाई है।
अगस्त 2024 में कोलकाता के सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल की एक महिला डॉक्टर के साथ हुए रेप और मर्डर के खिलाफ पश्चिम बंगाल में जूनियर डॉक्टरों के विरोध प्रदर्शन आंदोलन में अनिकेत महतो प्रमुख चेहरों में से एक थे। पिछले गुरुवार को, उन्होंने इस आंदोलन का नेतृत्व करने वाली संस्था वेस्ट बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फ्रंट के ‘बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज’ के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था।

