नई दिल्ली, 18 जनवरी (आईएएनएस)। 19 जनवरी से माघ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो रही है। इस दौरान भक्त मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए कई विशेष चीजें अर्पित करते हैं, जैसे लौंग, ज्वार-ज्वारे का रस, पान का पत्ता, किशमिश, गुड़, तिल और इलायची। ये न केवल देवी को प्रिय हैं, बल्कि आयुर्वेद में इन्हें औषधीय गुणों का खजाना माना जाता है।
देवी को प्रिय ये चीजें सेहत का खजाना भी हैं, जो पाचन, रोग प्रतिरोधक क्षमता, श्वसन और तन मन दोनों के स्वास्थ्य को मजबूत बनाती हैं। गुप्त नवरात्रि में इनका भोग लगाने से आध्यात्मिक और शारीरिक लाभ दोनों मिलते हैं।
लौंग:- लौंग को आयुर्वेद में खासा स्थान प्राप्त है। नेचुरल पेन किलर के इस्तेमाल से दांत दर्द, माइग्रेन के साथ ही मुंह की दुर्गंध और पाचन समस्याओं में भी राहत मिलती है। इसमें यूजेनॉल नामक तत्व होता है, जो एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण प्रदान करता है। यह खांसी, सर्दी-जुकाम में राहत देता है और पेट की गैस, एसिडिटी को दूर करता है। लौंग चबाने से मुंह ताजा रहता है और इम्यूनिटी बढ़ती है।
ज्वार-ज्वारे का रस :- ज्वारे का रस आयुर्वेद में अमृत तुल्य माना जाता है। यह विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है। ज्वारे का रस शरीर को अंदर से साफ कर, ब्लड शुगर कंट्रोल करता है और डायबिटीज में भी फायदेमंद है। यह पाचन सुधारता है, वजन घटाने में मदद करता है और जोड़ों के दर्द, सूजन को कम करता है। कलश स्थापना में ज्वार बेहद जरूरी होता है।
पान का पत्ता:- यह आयुर्वेद में पाचन, श्वसन और मुंह स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है। यह एंटीसेप्टिक गुणों से भरपूर होता है, जो बैक्टीरिया से लड़ता है और मुंह की दुर्गंध दूर करता है। पान का पत्ता कब्ज, एसिडिटी और खांसी में राहत देता है। इसमें विटामिन सी और कैल्शियम होता है, जो इम्यूनिटी बढ़ाता है। देवी को प्रिय यह पत्ता स्वास्थ्य के लिए वरदान है। कात्यायनी देवी की आराधना पान मुंह में रखकर की जाती है। नौ दुर्गा के साथ ही दस महाविद्याओं को भी पान अति प्रिय है।
किशमिश :- देवी को प्रिय किशमिश आयुर्वेद में रक्त शोधक और बलवर्धक मानी जाती है। यह आयरन से भरपूर होती है, जो एनीमिया दूर करती है और खून बढ़ाती है। किशमिश पाचन सुधारती है, कब्ज से राहत देती है और हृदय स्वास्थ्य के लिए अच्छी है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो त्वचा चमकाते हैं और थकान मिटाते हैं।
गुड़ :- गुप्त नवरात्रि का पहला दिन मां काली को समर्पित होता है, जिन्हें गुड़ बेहद प्रिय है। आयुर्वेद में इसे मिठास का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है। यह आयरन, मैग्नीशियम और पोटेशियम से युक्त होता है, जो एनीमिया रोकता है और हड्डियां मजबूत करता है। गुड़ पाचन सुधारता है, कब्ज दूर करता है और श्वसन समस्याओं में लाभ देता है। यह शरीर को गर्म रखता है और डिटॉक्स करता है। इसके सेवन से पीरियड्स की समस्याओं में भी राहत मिलती है।
तिल :- आयुर्वेद में इसे वात दोष शांत करने वाला और पोषक माना जाता है। यह कैल्शियम से भरपूर होता है, जो हड्डियां मजबूत करता है और ऑस्टियोपोरोसिस रोकता है। तिल त्वचा, बालों के लिए अच्छा है और इम्यूनिटी बढ़ाता है। यह जोड़ों के दर्द में राहत देता है और ऊर्जा प्रदान करता है। काला और सफेद दोनों तिल सेहत के लिए लाभदायी माने जाते हैं।
इलायची :- आयुर्वेद में त्रिदोष शांत करने वाली मानी जाती है। यह पाचन सुधारती है, गैस और ब्लोटिंग दूर करती है। इलायची मुंह ताजा रखती है, श्वसन तंत्र को साफ करती है और खांसी में राहत देती है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो इम्यूनिटी बढ़ाते हैं और हृदय स्वास्थ्य बनाए रखते हैं।
शहद :- आयुर्वेद में शहद या मधु को भी अमृत तुल्य माना जाता है। इसमें एंटीबैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। यह कफ दोष संतुलित करता है, खांसी, गले की खराश, सर्दी-जुकाम में राहत देता है। घाव जल्दी भरते हैं, पाचन सुधारता है, इम्युनिटी बढ़ाता है। योगवाही गुण से अन्य औषधियों का असर कोशिकाओं तक पहुंचाता है। हृदय स्वास्थ्य, वजन नियंत्रण और त्वचा के लिए लाभकारी है।

