मणिशंकर अय्यर को हिंदू और हिंदुत्व की समझ नहीं: बाबूलाल मरांडी

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रांची, 12 जनवरी (आईएएनएस)। भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के हिंदुत्व वाले बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी हों या फिर मणिशंकर अय्यर, इन्हें न तो हिंदू समझ आता है और न ही यह हिंदुत्व को समझ सकते हैं।

रांची में आईएएनएस से बातचीत में बाबूलाल मरांडी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के जो नेता हैं, वे न तो हिंदू धर्म को समझते हैं और न ही हिंदुत्व को जानते हैं। अगर समझते भी हैं, तो वे शुतुरमुर्ग की तरह सच को छिपाते हैं, जो रेत में अपना सिर छिपा लेता है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी हिन्दू थे। लेकिन, आज क्या स्थिति है? आज भी आए दिन बांग्लादेश में हिन्दुओं को मारा जाता है। पाकिस्तान से मार-मार कर हिन्दुओं को भगाया गया। अगर हिन्दू संगठित नहीं होंगे, तो हिन्दू और हिंदुत्व पर खतरा सदैव बना रहेगा, लेकिन यह कांग्रेस नेता को दिखाई नहीं देता। वे सिर्फ अपना अधूरा ज्ञान हिन्दुत्व पर देने लगते हैं। ज्ञान देने से पहले ज्ञान अर्जित करना भी जरूरी होता है।

भाजपा नेता ने कहा कि वोट बैंक की राजनीति ने कांग्रेस को अंधा कर दिया है इसीलिए उनको कुछ भी नजर नहीं आता है।

बांग्लादेश में हिन्दुओं के प्रति हो रहे अत्याचार का जिक्र करते हुए भाजपा नेता ने कहा कि कांग्रेस के नेता बांग्लादेश के मुद्दे पर कुछ नहीं बोलते, विरोध तक नहीं करते। वहां आए दिन हिन्दुओं को मारा जा रहा है। कांग्रेस के लोगों ने चुप्पी साध रखी है। हिंदू तो गलत को गलत कहता है, कभी स्वीकार नहीं करता।

उन्होंने रामायण के कुछ पात्रों का जिक्र करते हुए कहा कि हिन्दू कभी भी रावण या विभीषण के नाम पर अपने बच्चों का नामकरण नहीं करता है क्योंकि हिन्दू गलत को गलत कहना जानता है।

भाजपा नेता ने कहा कि अगर कांग्रेस को हिंदू और हिंदुत्व समझना है, तो गांव-गांव जाकर समझना होगा। कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर हों या राहुल गांधी, इन्हें कभी हिन्दू और हिंदुत्व समझ नहीं आएगा क्योंकि उनकी आंखों पर वोट बैंक की पट्टी बंधी हुई है।

मुंबई में बीएमसी चुनाव के बीच राज ठाकरे के बयान पर उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें सत्ता से बेदखल कर दिया है। उनकी राजनीतिक जमीन समाप्त हो चुकी है, इसलिए वे ऐसी भाषा का प्रयोग करते हैं। जनता साथ नहीं दे रही, तो वे कुछ भी बोल रहे हैं। जितना भी ऐसी भाषा का इस्तेमाल करेंगे, जनता के सामने उनका चरित्र उजागर होगा। जनसमर्थन तो नहीं मिलेगा, बस सबकुछ खो देंगे।