मौलाना मदनी के विवादित बयान देश के ज्‍वलंत मुद्दों से जनता का ध्‍यान भटकाने वाले हैं: प्रियंका चतुर्वेदी

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नई दिल्‍ली, 30 नवंबर (आईएएनएस)। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी के बयान पर राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं जारी हैं। इसे लेकर शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि ऐसे बयान देश के ज्‍वलंत मुद्दों से जनता का ध्‍यान भटकाने के लिए दिलाए जाते हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्‍होंने आईएएनएस से बातचीत में इस मुद्दे को मीडिया की ओर से बनाए गए अनावश्यक विवाद के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा कि उन्हें हैरानी इस बात की है कि अचानक महमूद मदनी को अत्यधिक लाइमलाइट में लाया जा रहा है। मीडिया बार-बार उनसे विवादित बयान दिलवा रहा है, जिससे साफ तौर पर एक एजेंडा झलकता है—जनता के सामने मौजूद गंभीर मुद्दों से ध्यान भटकाना।

प्रियंका चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि देश जिन अहम चुनौतियों से जूझ रहा है, जैसे वोट चोरी के आरोप, एसआईआर से जुड़ी जटिल प्रक्रियाएं, भ्रष्टाचार और युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी—इन सब पर चर्चा से बचने के लिए ऐसे मुद्दों को हवा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि इससे किस राजनीतिक दल को फायदा मिलता है, यह किसी से छिपा नहीं है। उनका कहना था कि इस तरह की विवादित बयानबाजी को राजनीतिक टूल की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग सुप्रीम कोर्ट की निष्ठा पर लगातार सवाल उठा रहे हैं, वे सरासर गलत हैं।

प्रियंका चतुर्वेदी ने आतंकी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पहलगाम और दिल्ली में हाल ही में हुए आतंकी हमलों से यह साफ होता है कि जैश-ए-मोहम्मद भारत में अशांति फैलाने का बड़ा एजेंडा लेकर चल रहा था। उन्होंने चेतावनी दी कि ‘जिहाद’ जैसी भाषा का इस्तेमाल पाकिस्तान द्वारा युवाओं को भ्रमित करने और उन्हें भड़काने के लिए किया जा रहा है, जिससे आतंकी संगठनों को बल मिल सकता है। उन्होंने गृह मंत्रालय से सवाल पूछा कि इस गंभीर मुद्दे पर उसकी क्या कार्रवाई है।

इधर, आरजेडी नेता कुमार सर्वजीत ने भी इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत इसकी विविधता है, जहां हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई भाईचारे के साथ मिलकर रहते हैं। उन्होंने कहा कि बांटने वाली भाषा का इस्तेमाल निंदनीय है और लोकतांत्रिक देश में किसी भी व्यक्ति को ऐसी बयानबाजी से बचना चाहिए।

कुमार सर्वजीत ने आगे कहा कि अगर किसी को लगता है कि लोग उसके प्रति गलत भावना रखते हैं तो लोकतंत्र में सड़क और सदन दोनों उपलब्ध हैं। आंदोलन करना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन इसके लिए देशभक्ति की भावना के साथ अपनी बात रखनी चाहिए, न कि समाज को बांटने वाली भाषा का प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश को एकजुट रखना प्रधानमंत्री का दायित्व है, और ऐसी स्थितियों में सरकार को ज्यादा संवेदनशील और जिम्मेदार रुख अपनाना चाहिए।