मुर्शिदाबाद/चेन्नई, 29 अगस्त (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयानों ने सियासत में नया विवाद खड़ा कर दिया है। उनके ‘हिंदू राष्ट्र’ और ‘तीन बच्चे’ वाले बयानों पर कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। दोनों दलों ने मोहन भागवत के बयानों को देश की एकता और सामाजिक-आर्थिक स्थिति के लिए अनुचित करार दिया है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने मोहन भागवत के ‘हिंदू राष्ट्र’ वाले बयान पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “इसमें क्या नई बात है? पूरा हिंदुस्तान एक है। कोई उनसे यह नहीं पूछ रहा कि हिंदुस्तान एक है या नहीं। आरएसएस और उनके सहयोगी बार-बार हिंदू राष्ट्र, हिंदी भाषा, एक भाषा, एक शिक्षा और हिंदुत्व को देश पर थोपने की बात करते हैं। यह उनकी विचारधारा है, लेकिन उनकी बातें कभी हां तो कभी ना में उलझी रहती हैं। नेताओं को साफ और स्पष्ट बात करनी चाहिए। गोल-मोल जवाब देना किसी नेता को शोभा नहीं देता।”
चौधरी ने आरएसएस की विचारधारा पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी बातें अस्पष्ट और भ्रामक हैं, जो जनता को भटकाने का काम करती हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “उनकी एक स्वतंत्र पहचान है। इसके अलावा, वह लोकसभा में एक जनप्रतिनिधि हैं। मुझे नहीं पता कि उन्होंने किस दृष्टिकोण से या किस आधार पर यह टिप्पणी की और मेरा मानना है कि उन्हें स्पष्टीकरण देना चाहिए। मैं इस पर टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं हूं। हालांकि, सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों को निश्चित रूप से स्थापित प्रोटोकॉल, नैतिकता और शिष्टाचार का पालन करना चाहिए। मेरा मानना है कि कोई भी बयान देते समय इन मानदंडों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन नहीं करेगा।”
वहीं दूसरी ओर, डीएमके प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने मोहन भागवत के ‘सभी भारतीयों को तीन बच्चे पैदा करने चाहिए’ वाले बयान की कड़ी आलोचना की।
उन्होंने कहा, “भारत पहले ही दुनिया का सबसे बड़ा आबादी वाला देश है। यहां गरीबी किसी भी अन्य देश से कहीं ज्यादा है। जनसंख्या वृद्धि से गरीबी और बढ़ेगी, लेकिन इस सरकार को इसकी कोई चिंता नहीं है। मुझे समझ नहीं आता कि मोहन भागवत ने ऐसा बयान कैसे दे दिया। आरएसएस की सोच में वैज्ञानिकता का अभाव है।”
एलंगोवन ने जोर देकर कहा कि जनसंख्या नियंत्रण और गरीबी उन्मूलन जैसे मुद्दों पर गंभीर और तथ्यपरक चर्चा की जरूरत है, न कि ऐसी बयानबाजी की, जो समाज में भ्रम को हवा दे।