सदन का समय घटा तो कमजोर होगा लोकतंत्र, पर्याप्त कार्यवाही जरूरी: ओम बिरला

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लखनऊ, 19 जनवरी (आईएएनएस)। लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा, निष्पक्षता और प्रभावशीलता को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (एआईपीओसी) का उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शुभारंभ हुआ। तीन दिवसीय इस राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किया।

सम्मेलन में देश के 28 राज्यों, 3 केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं तथा 6 विधान परिषदों के पीठासीन अधिकारी भाग ले रहे हैं। इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सदन का समय घटा तो कमजोर होगा लोकतंत्र, पर्याप्त कार्यवाही जरूरी है।

ओम बिरला ने कहा कि पीठासीन अधिकारी चाहे जिस भी राजनीतिक दल से निर्वाचित होकर आए हों, उनका आचरण दलगत राजनीति से ऊपर उठकर पूर्णतः न्यायपूर्ण, निष्पक्ष और गरिमामय होना चाहिए तथा ऐसा दिखाई भी देना चाहिए। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुभकामना संदेश सम्मेलन में उपस्थित सभी पीठासीन अधिकारियों के समक्ष पढ़कर सुनाया।

उन्होंने कहा कि विधायिका जनता की आकांक्षाओं और आवाज को शासन तक पहुंचाने का सबसे सशक्त माध्यम है। ऐसे में राज्य विधानसभाओं की कार्यवाही का समय लगातार कम होना एक गंभीर विषय है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य विधानमंडलों की कार्यवाही के लिए एक निश्चित और पर्याप्त समय सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है, क्योंकि सदन जितना अधिक चलेगा, उतनी ही अधिक सार्थक, गंभीर और परिणामोन्मुख चर्चा संभव होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया के इस युग में जनप्रतिनिधियों के प्रत्येक आचरण पर जनता की सीधी निगाह रहती है। ऐसे में संसदीय शिष्टाचार, अनुशासन और सदन की मर्यादा का पालन पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। तकनीक के इस दौर में सदन की प्रामाणिकता बनाए रखना सभी पीठासीन अधिकारियों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन जैसे मंच लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच सहयोग और समन्वय को सुदृढ़ करते हैं तथा शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन सम्मेलनों के माध्यम से देशभर में नीतियों, नियमों और कल्याणकारी कार्यक्रमों में सामंजस्य स्थापित करने में भी सहायता मिलती है।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि यूपी की धरती राजनीतिक चेतना की धरती है। यह दुनिया का सबसे बड़ा प्रदेश है। इसकी जितनी आबादी है, वह दुनिया के कई देशों की आबादी से ज्यादा है। इस सम्मेलन में अलग-अलग राज्यों के पीठासीन अधिकारी आए हैं, जिनकी जिम्मेदारी है कि विधानमंडल की गरिमा प्रभावशालीता की हो। हम यहां से नई ऊर्जा लेकर जाएं और हमारे लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा और मर्यादा बढ़े।