नई दिल्ली, 19 जनवरी (आईएएनएस)। डिजिटल दुनिया में मोबाइल, लैपटॉप और लंबे समय तक कुर्सी पर बैठे रहने की आदत ने हमारी दिनचर्या को सुस्त बना दिया है। नतीजा यह है कि शरीर के अंदरूनी अंग ठीक से काम नहीं कर पाते, मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और कई बीमारियां जन्म लेने लगती हैं।
इन्हीं समस्याओं में एक बड़ी परेशानी है किडनी से जुड़ी दिक्कतें, खासकर पथरी की। गलत खान-पान, कम पानी पीना और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण आज कम उम्र के लोग भी पथरी की समस्या से जूझ रहे हैं।
जब किडनी में पथरी होती है, तो शरीर के अंदर जमा गंदगी बाहर नहीं निकल पाती। इससे तेज दर्द, जलन और कई बार संक्रमण तक हो जाता है। आमतौर पर लोग दवाइयों या ऑपरेशन का सहारा लेते हैं, लेकिन अगर समय रहते जीवनशैली सुधारी जाए, तो इस परेशानी से काफी हद तक बचा जा सकता है। योग इसी दिशा में एक सरल और प्राकृतिक उपाय है। योग शरीर को बिना नुकसान पहुंचाए अंदर से मजबूत करता है। इन्हीं योगासनों में एक प्रभावी आसन है सर्पासन, जिसे भुजंगासन या कोबरा पोज भी कहा जाता है।
सर्पासन दिखने में जितना आसान है, असर में उतना ही गहरा है। यह आसन शरीर के निचले हिस्से, खासकर पेट और कमर के आसपास के अंगों पर सीधा प्रभाव डालता है। जब हम सर्पासन करते हैं, तो पेट के बल लेटकर शरीर को ऊपर उठाया जाता है। इस दौरान पेट, कमर और रीढ़ की हड्डी पर हल्का दबाव पड़ता है। यही दबाव किडनी के लिए फायदेमंद साबित होता है। इससे किडनी के आसपास की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं और वहां जमा विषैले तत्व धीरे-धीरे बाहर निकलने की प्रक्रिया तेज होती है।
पथरी बनने की एक बड़ी वजह यह भी है कि किडनी ठीक से साफ नहीं हो पाती। सर्पासन करने से शरीर के अंदर रक्त संचार बेहतर होता है। जब खून का बहाव तेज और सही दिशा में होता है, तो किडनी को ज्यादा ऑक्सीजन और पोषण मिलता है। इससे किडनी अपनी सफाई का काम अच्छे से कर पाती है। नियमित अभ्यास से छोटी पथरी धीरे-धीरे टूटकर पेशाब के रास्ते बाहर निकलने में मदद मिल सकती है। यही वजह है कि योग विशेषज्ञ पथरी के शुरुआती चरण में सर्पासन को काफी उपयोगी मानते हैं।
सिर्फ पथरी ही नहीं, सर्पासन रीढ़ की हड्डी को भी मजबूती देता है। आजकल कमर और पीठ दर्द आम समस्या बन गई है। इस आसन से पीठ की मांसपेशियां खिंचती हैं और उनमें लचीलापन आता है। इससे रीढ़ सीधी और मजबूत बनती है। मजबूत रीढ़ का सीधा असर शरीर के बाकी अंगों पर भी पड़ता है।
मानसिक तनाव भी कई बीमारियों की जड़ होता है। जब शरीर में दर्द या कोई अंदरूनी समस्या होती है, तो मन भी बेचैन रहता है। सर्पासन करते समय गहरी सांस ली जाती है, जिससे फेफड़े अच्छे से काम करते हैं और दिमाग तक ज्यादा ऑक्सीजन पहुंचती है। इससे मन शांत होता है और तनाव कम होने लगता है।
सर्पासन त्वचा और चेहरे के लिए भी लाभकारी माना जाता है। जब शरीर में रक्त संचार सही होता है, तो उसका असर चेहरे पर भी दिखता है। चेहरे पर प्राकृतिक चमक आती है और शरीर में ताजगी महसूस होती है। यही नहीं, यह आसन पाचन तंत्र को भी सक्रिय करता है, जिससे पेट साफ रहता है और शरीर में गंदगी जमा नहीं हो पाती।
सर्पासन करने की विधि भी बहुत सरल है। पेट के बल लेटकर हथेलियों को छाती के पास रखें, फिर धीरे-धीरे सांस लेते हुए शरीर को ऊपर उठाएं। सिर को पीछे की ओर ले जाकर ऊपर देखें और कुछ देर इसी स्थिति में रहें। फिर आराम से वापस मुद्रा में आ जाएं। इसे रोजाना कुछ मिनट करने से शरीर में बड़ा बदलाव महसूस किया जा सकता है।

