भोपाल : 27 फरवरी/ बढ़ती प्रतिस्पर्धा और बोर्ड परीक्षाओं के दबाव के बीच बच्चों में बढ़ रहे तनाव और आत्महत्या जैसी गंभीर समस्या की रोकथाम के लिए सत्यमेव मानसिक विकास केंद्र ने एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। यह सत्र गुरुवार, 27 फरवरी को आंगनबाड़ी क्रमांक 1146 गोविंदपुरा में आयोजित किया गया, जिसका मुख्य विषय मानसिक स्वास्थ्य और कैरियर चयन रहा।
कार्यक्रम की निदेशिका और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ स्मिता कुमारी ने बच्चों के साथ-साथ उनके अभिभावकों को संबोधित करते हुए कैरियर चयन की प्रक्रिया और उससे जुड़ी तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बोर्ड परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए बेहतर परिणाम लाने और भविष्य के लिए रणनीति बनाने के टिप्स दिए।
स्मिता कुमारी ने विशेष रूप से लड़कियों को शिक्षित और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के फायदे गिनाए। उन्होंने कहा कि आर्थिक सशक्तिकरण से लड़कियों में निर्णय लेने की क्षमता और आत्मविश्वास बढ़ता है। यह घरेलू हिंसा को रोकने में भी मददगार साबित होता है। उन्होंने कहा, “आर्थिक रूप से सक्षम होने पर लड़कियां परिवार के किसी भी आर्थिक संकट में सहयोग कर सकती हैं।”
कैरियर और सफलता के मंत्र पर बात करते हुए उन्होंने जोर दिया कि किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए कठिन मेहनत के साथ ही धैर्य और आत्मविश्वास भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों की तुलना दूसरों से न करें, क्योंकि इससे सिर्फ तनाव बढ़ता है, सफलता नहीं मिलती। आत्महत्या के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए स्मिता कुमारी ने कहा, “आत्महत्या किसी भी परेशानी का समाधान नहीं है। धैर्य और विश्वास रखेंगे तो कठिन से कठिन दौर भी निकल जाएंगे और सपने पूरे होंगे।”
गौरतलब है कि स्मिता कुमारी पिछले ग्यारह वर्षों से मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं। वे राज्य महिला आयोग, मध्यप्रदेश के सहयोग से पिछले तीन महीनों से हर माह आंगनबाड़ियों में निःशुल्क मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं। इस श्रृंखला के तहत दिसंबर में दिव्यांगता, एड्स जागरूकता और भोपाल गैस त्रासदी पर, जनवरी में वृद्धजनों के स्वास्थ्य पर कार्यक्रम हुए। फरवरी में बोर्ड परीक्षा को देखते हुए यह कैरियर काउंसलिंग सत्र रखा गया।
इस दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सविता वर्मा, सहायिका निशा सहित 14 बच्चे और 10 अभिभावक मौजूद रहे। कार्यक्रम में खुलकर सवाल-जवाब हुए और कुछ बच्चों एवं अभिभावकों से उनकी व्यक्तिगत समस्याओं पर भी चर्चा की गई।


