शहजाद पूनावाला ने ई-सिगरेट घटना पर उठाया सवाल, कहा- क्या अब भी टीएमसी नहीं लेगी एक्शन?

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नई दिल्ली, 11 दिसंबर (आईएएनएस)। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने गुरुवार को संसद की मर्यादा तोड़ने के लिए विपक्ष की आलोचना की और ई-सिगरेट की घटना पर टीएमसी से सवाल किए। उन्होंने कहा कि आज एक बार फिर हमने एक और अपमानजनक हरकत देखी है, जिसके बारे में सांसद अनुराग ठाकुर ने सदन और स्पीकर को अवगत कराया। जैसा कि आप जानते हैं, 2019 में देश में ई-सिगरेट पर पूरी तरह बैन लगा दिया गया था। आपको यह भी पता है कि सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम के तहत, सार्वजनिक जगहों पर धूम्रपान की इजाजत नहीं है। संसद परिसर और सदन के अंदर ऐसे पदार्थों का सेवन सख्त मना है, लेकिन इन सभी नियमों का उल्लंघन एक टीएमसी सांसद ने किया।

उन्होंने आगे कहा कि टीएमसी सांसद ने ई-सिगरेट का इस्तेमाल करके नियम तोड़ा है, इसलिए आज यह सवाल स्वाभाविक रूप से टीएमसी पर ही उठता है। जब पहली नजर में ही इतना गंभीर उल्लंघन हुआ है, तो क्या वे अपने ही सदस्य के खिलाफ समय पर कार्रवाई करेंगे, जिसने ऐसी गलत मिसाल कायम की है, या वे स्पीकर के कार्रवाई करने का इंतजार करेंगे?

उन्होंने बताया कि इस पर संज्ञान लेते हुए स्पीकर ने भी कहा कि ये पूर्ण तरीके से गलत है, इसकी जांच होगी, और जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर कार्रवाई की जाएगी।

पूनावाला ने बताया कि कुछ दिन पहले, इसी सत्र में हमने देखा कि एक सांसद संसद में कुत्ते को लेकर आती हैं। हमें कुत्ते से कोई दर्द नहीं है, हम तो पशुप्रेमी हैं। लेकिन, कुत्ते को लाने के बाद वह सांसद कहती है कि ये नहीं काटता, पर जो अंदर हैं वो काटते हैं। मतलब हमारा पार्लियामेंट्री स्टाफ, पार्लियामेंट्री सिक्योरिटी और संसद सदस्य कुत्ते हैं, जो काटते हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या उनके खिलाफ संसदीय विशेषाधिकार प्रस्ताव लाया जा सकता है, तो उन्होंने भौंकते हुए कुत्ते की आवाज निकालकर जवाब दिया। राहुल गांधी ने इस व्यवहार का समर्थन किया।

उन्होंने कहा कि इन घटनाओं को देखते हुए एक और सवाल भी उठता है। क्या इन पार्टियों में हक का ऐसा भाव आ गया है कि वे बार-बार हमारे लोकतंत्र की सबसे पवित्र संस्था, संसद की गरिमा को तार-तार कर देती हैं और उसे नाटक का मंच बना देती हैं? टीएमसी को इसका साफ और सीधा जवाब देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हुमायूं कबीर (बाबरी वाले) से लेकर शाहजहां शेख (संदेशखली) तक टीएमसी बार-बार ये प्रमाण देती है कि उनका हाथ हमेशा अपने वोटबैंक के साथ है। आज पश्चिम बंगाल से एक रिपोर्ट आई है कि कैसे शाहजहां शेख ने पश्चिम बंगाल की जेल से अपने खिलाफ गवाही देने वाले एक व्यक्ति के ऊपर हमला करवाया और उसकी हत्या करवा दी। इस संदर्भ में कहा जा सकता है कि आज टीएमसी का मतलब है ‘टोटल ममता फॉर क्रिमिनल्स।’

उन्होंने बताया कि संदेशखाली केस में एक अहम गवाह भोलानाथ घोष को जानबूझकर एक ट्रक से टक्कर मारी गई, ताकि उसे मारा जा सके, जैसा कि चश्मदीदों ने बताया है। वह इस हमले में बच गया और उसने कहा कि शाहजहां उसकी गवाही को चुप कराने के लिए उसे निशाना बना रहा है। इसीलिए हम कहते हैं कि दुनिया ने सरकारों से गवाहों की सुरक्षा के बारे में सुना है, लेकिन बंगाल में टीएमसी के राज में हम बिल्कुल अलग देख रहे हैं—गवाहों को खत्म करना। यह काम जेल के अंदर से भी किया जा रहा है और टीएमसी के सिस्टम द्वारा इसे सपोर्ट मिल रहा है।

बिहार में एक लंबे दौर तक आरजेडी का जंगलराज चला। आज वहां तो जंगलराज समाप्त हो चुका है और जंगलराज लाने वालों को भी बिहार की जनता ने बाहर कर दिया। लेकिन, बंगाल में भी वही लालू वाला जंगलराज लाने की पूरी कोशिश टीएमसी और ममता बनर्जी द्वारा की जा रही है। आज पश्चिम बंगाल में मां, माटी, मानुष नहीं, बल्कि अपराधी बचाओ, बलात्कारी बचाओ, भ्रष्टाचारी बचाओ, दंगाई बचाओ और घुसपैठिया बचाओ चल रहा है।

टीएमसी नेताओं ने कहा कि राहुल गांधी को हटाया जाना चाहिए और ममता दीदी को आगे लाया जाना चाहिए, तभी इंडिया गठबंधन का कोई मतलब रहेगा। उनका दावा है कि राहुल गांधी या कांग्रेस में अब कोई दम नहीं बचा है। अगर राहुल गांधी को लगता है कि कथित वोट चोरी की वजह से कांग्रेस चुनाव हारी, तो ऐसा क्यों है कि उनके अपने पार्टनर को भी अब उन पर भरोसा नहीं रहा?