श्री उग्रतारा मंदिर : मकर संक्रांति पर सूर्य की उपासना से पहले देवी दर्शन, 56 व्यंजनों का भी भोग

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नई दिल्ली, 7 जनवरी (आईएएनएस)। उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक मकर संक्रांति का त्योहार अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है। बिहार में एक ऐसा मंदिर स्थापित है, जहां सूर्य की उपासना से पहले मां का आशीर्वाद लिया जाता है।

हम बात कर रहे हैं बिहार के उग्रतारा मंदिर की, जहां मकर संक्रांति पर मां की भव्य उपासना की जाती है और आधी रात छप्पन भोग लगाया जाता है।

सहरसा स्टेशन से लगभग 17 किलोमीटर पश्चिम में महिशी गांव में उग्रतारा मंदिर स्थित है, जिसे महिषासुरमर्दिनी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर बहुत प्राचीन है। मंदिर के गर्भगृह में भगवती तारा की प्रतिमा विराजमान हैं। भगवती तारा की मान्यता इतनी ज्यादा है कि भक्त दर्शन के लिए दूर-दूर से आते हैं। मकर संक्रांति के दिन मां के भव्य दर्शन होते हैं। भक्त आशीर्वाद लेते हैं और फिर भगवान सूर्य की उपासना करते हैं।

मकर संक्रांति पर मां उग्रतारा को 56 भोग का प्रसाद चढ़ाया जाता है, जिसमें सामिष और निरामिष दोनों प्रकार के व्यंजन और खट्टे-मीठे भोजन भी शामिल किए जाते हैं। मां को भोग लगाने के बाद प्रसाद को भक्तों में वितरित कर दिया जाता है। माना जाता है कि मकर संक्रांति के दिन मां का पूजन करने से जीवन में सुख और समृद्धि का वास होता है और हर कष्ट से मुक्ति मिलती है।

मां उग्रतारा का मंदिर 51 शक्तिपीठों में शामिल है, जहां माता सती की बाईं आंख गिरी थी। आंख गिरने की वजह से इस पवित्र स्थान को उग्रतारा नाम दिया गया। मंदिर में तंत्र साधना से जुड़े अनुष्ठान भी होते हैं।

वहीं, तंत्र विद्या में सिद्धि पाने वाले अघोरी और साधु मंदिर में विशेष अनुष्ठान करते हैं। कहा जाता है कि अगर किसी पर काले जादू का प्रभाव है, तो मां तारा का दर्शन करने से काला जादू भी कमजोर पड़ जाता है।

स्थानीय मान्यता है कि यह मंदिर इच्छापूर्ति और मुक्ति का मार्ग प्रदान करता है। नवरात्रि के मौके पर मंदिर में विशाल मेला भी लगता है, जहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। नवरात्रि के अलावा, हर शनिवार को भी मंदिर में भक्तों का तांता देखने को मिलता है।