चेन्नई, 22 जनवरी (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गुरुवार को तमिलनाडु के उप मुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन से तुरंत इस्तीफे की मांग की। पार्टी ने इसके लिए मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच के उस फैसले का हवाला दिया, जिसमें भाजपा नेता अमित मालवीय के खिलाफ एफआईआर को रद्द कर दिया गया था।
तमिलनाडु भाजपा के प्रवक्ता एएनएस प्रसाद ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले ने उदयनिधि स्टालिन की पब्लिक ऑफिस में बने रहने की नाकाबिलियत को संवैधानिक और नैतिक रूप से बेनकाब कर दिया है।
उन्होंने कहा कि यह फैसला भाजपा के उस पुराने रुख को सही साबित करता है कि भड़काऊ बयानों की कानूनी आलोचना को अपराध नहीं बनाया जा सकता और असहमति को दबाने के लिए पुलिस मशीनरी का गलत इस्तेमाल न्यायिक जांच में टिक नहीं पाएगा।
मदुरै बेंच ने 20 जनवरी के अपने आदेश में भाजपा के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) विभाग के प्रभारी अमित मालवीय के खिलाफ उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म पर दिए गए बयानों पर सोशल मीडिया पोस्ट के लिए दर्ज आपराधिक मामले को रद्द कर दिया।
जस्टिस एस. श्रीमाथी ने कहा कि मालवीय का जवाब कोई अपराध नहीं था। उन्होंने एफआईआर को कानूनी प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग बताया।
एएनएस प्रसाद ने कहा कि यह फैसला सितंबर 2023 में एक कॉन्फ्रेंस में उप मुख्यमंत्री स्टालिन के अपने बयानों पर फिर से ध्यान दिलाता है, जहां उन्होंने सनातन धर्म को खत्म करने की बात कही थी और इसकी तुलना मलेरिया, डेंगू और कोरोनावायरस जैसी संक्रामक बीमारियों से की थी।
भाजपा के अनुसार, इन टिप्पणियों से लाखों नागरिकों की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची और यह भारतीयों के एक बड़े हिस्से द्वारा माने जाने वाले धर्म के खिलाफ नफरत भरी बातें थीं।
प्रसाद ने कहा, “संविधान धर्म की स्वतंत्रता और कानून के सामने समानता की गारंटी देता है और सभी समुदायों के बीच सद्भाव बनाए रखने की वकालत करता है। एक मंत्री जिसने संविधान को बनाए रखने की शपथ ली है, वह सार्वजनिक रूप से किसी भी धर्म का अपमान नहीं कर सकता।”
उन्होंने तर्क दिया कि हाईकोर्ट का फैसला सार्वजनिक हस्तियों को उनके शब्दों के लिए जवाबदेह ठहराने की वैधता को मजबूत करता है।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा, “इस्तीफा सिर्फ एक राजनीतिक मांग नहीं है। यह एक संवैधानिक और नैतिक जरूरत है।”

