तमिलनाडु में अधिकारियों के तबादलों में भ्रष्टाचार का आरोप, एमएडब्ल्यूएस विभाग को लेकर ईडी के गंभीर खुलासे

0
7

चेन्नई, 20 जनवरी (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तमिलनाडु सरकार के नगरपालिका प्रशासन और जल आपूर्ति विभाग (एमएडब्ल्यूएस) में अधिकारियों और इंजीनियरों के स्थानांतरण से जुड़े कथित भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर खुलासे किए हैं। ईडी द्वारा भेजे गए नोट और रिपोर्टों में विभाग के भीतर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और अनियमितताओं के ठोस सबूत होने का दावा किया गया है।

यह मामला सीधे तौर पर राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री के.एन. नेहरू और उनके करीबी सहयोगियों से जुड़ा बताया जा रहा है।

ईडी ने इससे पहले 27 अक्टूबर 2025 को एक विस्तृत रिपोर्ट के जरिए एमएडब्ल्यूएस विभाग में वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों की परीक्षाओं और चयन प्रक्रिया में भ्रष्टाचार से संबंधित जानकारी साझा की थी।

इस रिपोर्ट में बताया गया था कि चयन के बदले प्रत्येक उम्मीदवार से 25 से 35 लाख रुपए तक की रिश्वत ली गई। ईडी ने करीब 150 उम्मीदवारों का विवरण भी उपलब्ध कराया था, जिनकी जानकारी मंत्री के.एन. नेहरू के करीबी लोगों के मोबाइल फोन से मिली थी। इसके अलावा लगभग 2500 नियुक्तियों की गहन जांच की मांग भी की गई थी।

इसके बाद 3 दिसंबर 2025 को ईडी ने एक और पत्र के माध्यम से एमएडब्ल्यूएस के सरकारी ठेकों और कार्यों में बड़े स्तर पर हेरफेर और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। इस रिपोर्ट में बताया गया कि सरकारी निविदाओं में 7.5 से लेकर 15 प्रतिशत तक की धांधली की गई और करीब 1020 करोड़ रुपए की रिश्वत वसूली के प्रत्यक्ष सबूत भी सामने आए।

अब ईडी ने एक नया नोट भेजकर विभाग में अधिकारियों और इंजीनियरों के स्थानांतरण में भ्रष्टाचार से जुड़े साक्ष्यों को सामने रखा है। ईडी के अनुसार, स्थानांतरण पोस्टिंग के बदले भारी रकम ली जा रही थी और यह पूरा नेटवर्क मंत्री के.एन. नेहरू और उनके सहयोगियों के इर्द-गिर्द सक्रिय था। यह जांच सीबीआई-एसीबी, चेन्नई द्वारा दर्ज एक बैंक धोखाधड़ी के मामले के आधार पर दर्ज ईसीआईआर के तहत शुरू की गई थी।

जांच के दौरान ईडी ने अपराध से अर्जित धन से जुड़े कई दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अन्य अहम सबूत जब्त किए हैं। ईडी का कहना है कि अब तक सामने आए साक्ष्य एमएडब्ल्यूएस विभाग में भ्रष्टाचार के अलग-अलग पहलुओं को उजागर करते हैं और मामले की आगे गहन जांच जारी है। इस पूरे घटनाक्रम से तमिलनाडु की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में हलचल तेज हो गई है।