नई दिल्ली, 6 जनवरी (आईएएनएस)। वाराणसी के रोपवे को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में दावा किया जा रहा है कि रोपवे बीच-बीच में रुक रहा है और असुरक्षित रूप से हिल रहा है। बताया गया कि यह रोपवे से सफर करने वालों के लिए खतरनाक है। पीआईबी ने इस वायरल वीडियो का फैक्ट चेक किया है।
पीआईबी फैक्ट चेक में पाया गया कि वीडियो में किया जा रहा दावा भ्रामक है। पीआईबी की तरफ से बताया गया कि वीडियो में दिख रहा रोपवे, सुरक्षा नियमों का पालन करने के लिए टेस्टिंग प्रोसेस का एक हिस्सा है। सर्कुलेट किए गए वीडियो में दिख रहा रोपवे का झूलना सीईएन स्टैंडर्ड के तहत तय की गई मंजूर लिमिट के अंदर है और सिस्टम डिजाइन में इसका ध्यान रखा गया है।
पीआईबी की तरफ से बताया गया कि ओईएम टीम द्वारा की गई टेस्टिंग के दौरान गोंडोला में इमरजेंसी ब्रेक लगाए गए थे, ताकि मंजूर लिमिट के हिसाब से ज्यादा से ज्यादा रोपवे के झूलने की जांच की जा सके। ये झूलने की मूवमेंट गोंडोला के स्प्रिंग-लोडेड सपोर्ट अरेंजमेंट से कंट्रोल और मॉनिटर होती हैं और सीईएन और बीआईएस सहित लागू कोड और स्टैंडर्ड में बताई गई लिमिट के अंदर कम से कम की जाती हैं।
पीआईबी ने बताया कि सस्पेंशन सिस्टम में फ्लेक्सिबिलिटी का प्रावधान जानबूझकर किया गया है और यह रोपवे के नॉर्मल ऑपरेशन और रुकने के दौरान डायनामिक ऑपरेशनल फोर्स, हवा के लोड और एक्सेलरेशन-डीसेलरेशन इफेक्ट को अकोमोडेट करने के लिए जरूरी है। गोंडोला का स्विंग किसी स्ट्रक्चरल, मैकेनिकल या ऑपरेशनल कमी को नहीं दर्शाता है और यह ऑपरेशन के दौरान सभी कंडीशन में यात्रियों की सेफ्टी के लिए चेकिंग का एक हिस्सा है।
इस तरह पाया गया कि सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा भ्रामक है।
वाराणसी में महत्वाकांक्षी रोपवे परियोजना के तहत भारत का पहला और दुनिया का तीसरा सार्वजनिक परिवहन रोपवे बनाया गया है। यह रोपवे लगभग 4.2 किलोमीटर की दूरी तय करेगा और कैंट रेलवे स्टेशन (वाराणसी जंक्शन) को चर्च स्क्वायर (गोदौलिया) से जोड़ने वाला है। इसका मुख्य उद्देश्य शहर में यातायात की भीड़ को कम करने के लिए एक विश्वसनीय और कुशल परिवहन साधन उपलब्ध कराना है।

