यादों में जाफरी : बॉलीवुड में दमदार, हॉलीवुड में भी असरदार, निजी जीवन की ‘शतरंज’ पर हारने वाले ‘खिलाड़ी’

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नई दिल्ली, 7 जनवरी (आईएएनएस)। हिंदी सिनेमा में कई ऐसे कलाकार आए, जिन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों पर राज किया। कुछ कलाकार ऐसे भी रहे, जिनकी पहचान सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने हॉलीवुड तक अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया। ऐसे ही एक सितारे थे सईद जाफरी। पर्दे पर उनकी कामयाबी की कहानी जितनी चमकदार रही, निजी जीवन उतना ही तन्हाई और पछतावे से भरा रहा।

आज जब हम देखते हैं कि कोई बॉलीवुड अभिनेता हॉलीवुड फिल्म में काम कर ले तो उसे बड़ी उपलब्धि माना जाता है, लेकिन 60 के दशक में सईद जाफरी ने ये कारनामा कर दिखाया था। उस दौर में जब भारतीय कलाकारों के लिए विदेशी फिल्मों तक पहुंचना बेहद मुश्किल था, सईद जाफरी ने ब्रिटिश और अमेरिकन सिनेमा में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। उनके अभिनय की तारीफ सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी हुई।

8 जनवरी 1929 को जन्मे सईद जाफरी को बचपन से ही अभिनय का शौक था। बड़े होने पर उन्होंने इसी शौक को अपना पेशा बना लिया। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो से इंग्लिश अनाउंसर के तौर पर की थी। उनकी आवाज में एक अलग ही ठहराव और असर था, जो लोगों को तुरंत अपनी ओर खींच लेता था। इसके बाद उन्होंने थिएटर की दुनिया में कदम रखा और साल 1951 में फ्रैंक ठाकुरदास और बैंजी बेनेगल के साथ मिलकर अंग्रेजी थिएटर कंपनी ‘यूनिटी थिएटर’ की शुरुआत की।

थिएटर से फिल्मों तक का सफर सईद जाफरी के लिए आसान नहीं था, लेकिन उनकी मेहनत रंग लाई। उन्होंने फिल्म ‘गुरु’ से सिनेमा की दुनिया में कदम रखा और धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बना ली। उनका फिल्मी करियर लगभग छह दशक लंबा रहा, जिसमें उन्होंने 150 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। खास बात ये रही कि इनमें सिर्फ हिंदी फिल्में ही नहीं, बल्कि ब्रिटिश और अमेरिकन फिल्में भी शामिल थीं।

हॉलीवुड में सईद जाफरी ने द विल्बी कांस्पीरेसी, द मैन हू वुड बी किंग, स्फिंक्स और अ पैसेज टू इंडिया जैसी फिल्मों में दमदार भूमिकाएं निभाईं। रिचर्ड एटनबरो की फिल्म गांधी में भी उनका काम खूब सराहा गया। वे ब्रिटिश और कनाडाई फिल्म अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट होने वाले पहले एशियाई कलाकार भी बने। ये अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि थी।

वहीं हिंदी सिनेमा में भी सईद जाफरी ने कई यादगार किरदार निभाए। शतरंज के खिलाड़ी, चश्मे-बद्दूर, मासूम, दिल, हिना और राम तेरी गंगा मैली जैसी फिल्मों में उनके अभिनय ने दर्शकों के दिल जीत लिए। खासतौर पर राज कपूर की फिल्मों ने उन्हें भारत में जबरदस्त लोकप्रियता दिलाई। उनके निभाए किरदार आज भी याद किए जाते हैं।

लेकिन पर्दे पर इतनी कामयाबी के बावजूद सईद जाफरी का निजी जीवन काफी उलझनों भरा रहा। वे एक सफल अभिनेता जरूर थे, लेकिन एक पति और पिता के तौर पर खुद को असफल मानते रहे। उनकी पहली शादी मधुर से हुई थी, जो एक अभिनेत्री और बाद में मशहूर लेखिका बनीं। दोनों की मुलाकात थिएटर के दौरान हुई और साल 1958 में उन्होंने शादी कर ली।

शादी के बाद दोनों के बीच मतभेद बढ़ने लगे। कहा जाता है कि सईद जाफरी पर ब्रिटिश जीवनशैली का असर ज्यादा था और वे अपनी पत्नी को भी उसी अंदाज में देखना चाहते थे। इस वजह से रिश्ते में दूरियां आ गईं। इस शादी से उनकी तीन बेटियां हुईं, लेकिन इसके बावजूद दोनों का रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं चल सका और 1966 में तलाक हो गया।

तलाक के बाद सईद जाफरी एक विदेशी महिला के साथ रहने लगे, लेकिन बाद में उन्हें अपने इस फैसले पर गहरा पछतावा हुआ। वे खुद को पहली पत्नी और अपनी बेटियों का दोषी मानते रहे। कई इंटरव्यू में उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि करियर की दौड़ में उन्होंने अपने निजी रिश्तों को नजरअंदाज कर दिया।