सरयू राय ने आलमगीर आलम के खिलाफ कार्रवाई को सही ठहराया, ईडी की कार्यशैली पर उठाए सवाल

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रांची, 16 मई (आईएएनएस)। जमशेदपुर पूर्वी सीट से विधायक और भारतीय जनतंत्र मोर्चा के संयोजक सरयू राय ने मंत्री आलमगीर आलम के खिलाफ ईडी की कार्रवाई को जायज बताया है। उन्होंने कहा कि ईडी ने बेवजह आलमगीर आलम को गिरफ्तार नहीं किया है। उनके पीएस से लेकर नौकर तक भ्रष्टाचार की गंगा में डुबकी लगा रहे थे।

उन्होंने यह भी कहा कि ईडी को और भी नेताओं, मंत्रियों और अधिकारियों के खिलाफ ईमानदारी से जांच करनी चाहिए। बहरागोड़ा से लेकर रांची तक ऐसे भ्रष्टाचारी मिल जाएंगे। लोकसभा चुनाव में वह किस दल को समर्थन करने वाले हैं, इसके जवाब में उन्होंने कहा कि उनके पास इंडिया गठबंधन और एनडीए दोनों अलायंस के प्रत्याशी आ रहे हैं। फिलहाल, मैंने यह तय नहीं किया है कि किसे समर्थन करना है।

उन्होंने कहा कि केबुल टाउन क्षेत्रों के निवासियों के घरों में बिजली का सीधा कनेक्शन देने के बारे में झारखंड उच्च न्यायालय में दायर रिट याचिका न्यायालय ने स्वीकार कर लिया और दिवालिया केबुल कंपनी के आरपी याचिका में निहित बिन्दुओं का जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया। झारखंड सरकार और टाटा स्टील के अधिवक्ताओं ने याचिका का समर्थन किया। 10 जून को ग्रीष्मावकाश के बाद न्यायालय खुलने पर मामले की सुनवाई होगी।

उन्होंने कहा कि इस मामले में टाटा स्टील के वकील ने कहा कि कंपनी केबुल टाउन के सभी घरों में बिजली का सीधा कनेक्शन देने पर सहमत है। दिवालिया घोषित हो चुकी केबुल कंपनी के आरपी इसके लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं दे रहे हैं। ऐसे में मेरी मांग है कि टाटा स्टील को दिवालिया केबुल कंपनी के आरपी से अनापत्ति प्रमाण पत्र मांगने की कोई जरूरत नहीं है। इस अनापत्ति के चक्कर में केबुल टाउन वासियों को कई वर्षों से बेवजह परेशानी उठानी पड़ रही है और महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है।

उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग के विद्युत आपूर्ति संहिता में स्पष्ट प्रावधान है, “विद्युत आपूर्ति के लाइसेंस धारी को अपने क्षेत्रों के सभी घरों को बिजली कनेक्शन देना होगा भले ही गृह स्वामी के पास किसी भी प्रकार का आवासीय प्रमाण हो या नहीं।” विद्युत अधिनियम की धारा- 43 में भी इस बारे में स्पष्ट प्रावधान है कि किसी भी घर को बिजली कनेक्शन से वंचित नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि इस बारे में सर्वोच्च न्यायालय का भी एक मुकदमा संख्या 103/2013 में स्पष्ट आदेश है कि लाइसेंसी प्राधिकार गृहस्वामी अथवा निवासी को बिजली कनेक्शन देने के लिए बाध्य है। जब सर्वोच्च न्यायालय, विद्युत अधिनियम एवं विद्युत नियामक आयोग के निर्देश इतना स्पष्ट है तब जमशेदपुर के विद्युत लाइसेंसी टाटा स्टील की कंपनी टीएसयूआईएल को केबुल टाउन इलाका के घरों में बिजली का अलग कनेक्शन नहीं देकर इसके लिए दिवालिया केबुल कंपनी के आरपी से अनापत्ति प्रमाण पत्र मांगने का कोई औचित्य नहीं है। मुझे पूरा विश्वास है कि रिट याचिका की सुनवाई के बाद झारखंड उच्च न्यायालय से भी इसी आशय का निर्णय आएगा। तब, कंपनी के पास घरों को सीधा बिजली कनेक्शन देने के सिवाय कोई चारा नहीं रहेगा।