Thursday, May 28, 2026
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रबींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय में अभ्युदय भारत 2026 के अंतर्गत भगवान बिरसा मुंडा पर विशेष व्याख्यान आयोजित

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भोपाल : 20 मार्च/ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग, मध्यप्रदेश की पहल पर संचालित अभ्युदय भारत 2026 कार्यक्रम के अंतर्गत रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल के मानविकी एवं उदार कला संकाय एवं संस्कृत, प्राच्य भाषा एवं भारतीय ज्ञान परम्परा केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में महान स्वतंत्रता सेनानी एवं जननायक भगवान बिरसा मुंडा के जीवन और योगदान पर विशेष व्याख्यान का आयोजन मंथन सभागार में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को वनवासी समाज के महान नायक बिरसा मुंडा के संघर्ष, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक चेतना से परिचित कराना था। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं क्षेत्रीय गौसेवा प्रमुख श्री बृज किशोर भार्गव उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. रवि प्रकाश दुबे ने की।

अपने व्याख्यान में श्री बृज किशोर भार्गव ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा केवल एक स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि वनवासी समाज की अस्मिता, आत्मसम्मान और सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक थे। उनका जन्म 15 नवम्बर 1875 को झारखंड के उलीहातु में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने मिशनरी विद्यालय में प्राप्त की, परंतु शीघ्र ही उन्हें यह अनुभव हुआ कि अंग्रेजी शासन और मिशनरी गतिविधियाँ वनवासी समाज की संस्कृति, धर्म और परंपराओं को प्रभावित कर रही हैं। इसी जागरण ने उनके भीतर संघर्ष की ज्योति प्रज्वलित की।

उन्होंने बताया कि उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम दशक में बिरसा मुंडा के नेतृत्व में अंग्रेजों और शोषणकारी व्यवस्था के विरुद्ध एक व्यापक जनआंदोलन खड़ा हुआ, जिसे इतिहास में “उलगुलान” के नाम से जाना जाता है। यह आंदोलन केवल राजनीतिक स्वतंत्रता का ही नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक स्वतंत्रता का भी संघर्ष था। बिरसा मुंडा ने वनवासियों को अपनी भूमि, संस्कृति और धर्म की रक्षा के लिए संगठित किया।

श्री भार्गव ने कहा कि अंग्रेजी शासन ने इस आंदोलन को कुचलने के लिए बिरसा मुंडा को वर्ष 1900 में गिरफ्तार कर लिया और रांची जेल में ही उनका निधन हो गया। मात्र 25 वर्ष की आयु में उनका बलिदान हुआ, किंतु उनके संघर्ष ने अंग्रेजी शासन को वनवासी समाज की समस्याओं को स्वीकार करने के लिए बाध्य किया। उनके आंदोलन के परिणामस्वरूप बाद में छोटा नागपुर काश्तकारी अधिनियम (Chotanagpur Tenancy Act) जैसे महत्वपूर्ण कानून बने, जिनका उद्देश्य वनवासियों की भूमि की रक्षा करना था।

उन्होंने कहा कि वनवासी समाज आज भी बिरसा मुंडा को भगवान का दर्जा देता है, क्योंकि उन्होंने अपने समाज के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए जीवन अर्पित कर दिया। वनवासी कल्याण के दृष्टिकोण से बिरसा मुंडा का जीवन आज भी प्रेरणास्रोत है और उनके विचार समाज को आत्मसम्मान और स्वाभिमान की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश देते हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु प्रो. रवि प्रकाश दुबे ने कहा कि ऐसे महापुरुषों के जीवन पर चर्चा करना युवाओं के भीतर राष्ट्रभाव और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करता है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल अकादमिक शिक्षा देना ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को भारतीय इतिहास और महान विभूतियों से भी जोड़ना है।

इस अवसर पर अभ्युदय भारत कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित चित्रकला एवं नाटक प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को भी पुरस्कृत किया गया।

कार्यक्रम के अंत मे धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रुचि मिश्र तिवारी द्वारा प्रस्तुत किया गया। संचालन बीए ऑनर्स अंतिम वर्ष के विद्यार्थ पुष्पेंद्र ने किया। कार्यक्रम में समन्वयक के रूप में डॉ. सावित्री सिंह परिहार एवं डॉ. संजय दुबे का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम में डॉ. शैलेन्द्र सिंह, डॉ. अरुण कुमार पांडेय, डॉ. सुनीता वाणकर, डॉ. संगीत आमटे, डॉ. अनुपम मिश्रा सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी एवं प्राध्यापक गण उपस्थित थे।

विश्वविद्यालय में चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित

मानविकी एवं उदार कला संकाय द्वारा चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में कुल 22 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

प्रतियोगिता में राखी कुलस्ते (बीए 6th सेमेस्टर) ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि ललित मोहन पाल (बीए 6th सेमेस्टर) द्वितीय स्थान पर रहे। सोनिया मीणा (बीए 2nd सेमेस्टर) ने तृतीय स्थान हासिल किया। वहीं किरण बेदी (बीए 2nd सेमेस्टर) और वंशिका बघेल (बीए एलएलबी) को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।

बिरसा मुंडा पर नाटक का मंचन, टैगोर नाट्य विद्यालय रहा विजेता

महान स्वतंत्रता सेनानी एवं जननायक भगवान बिरसा मुंडा के जीवन और संघर्ष पर आधारित नाटक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस आयोजन में विश्वविद्यालय के मानविकी एवं उदार कला संकाय, विधि विभाग तथा टैगोर नाट्य विद्यालय के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए प्रभावशाली नाट्य प्रस्तुतियाँ दीं।

नाटक के माध्यम से विद्यार्थियों ने भगवान बिरसा मुंडा के जीवन, वनवासी समाज के अधिकारों के लिए उनके संघर्ष तथा अंग्रेजी शासन के विरुद्ध उनके आंदोलन को मंच पर जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। प्रस्तुतियों में उनके सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक स्वतंत्रता के संदेश को प्रभावी ढंग से दर्शाया गया। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए टैगोर नाट्य विद्यालय के विद्यार्थियों ने प्रथम स्थान प्राप्त किया और विजेता बने।