Wednesday, June 17, 2026
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भाषा का विवाद कुछ गिने-चुने राज्यों में ही क्यों है?

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कपिल भार्गव
भारत सरकार ने विद्यालयों में भाषा संगम का कार्यक्रम पिछले लगभग 5 वर्षों से चलाया है जिसके अंतर्गत छात्र भारत के विभिन्न राज्यों की भाषा को समझते हैं तथा उस भाषा के गीत गाते हैं, साथ ही साथ अंतर्राज्यीय संस्कृतियों तथा भाषा को समझते हैं। भाषा संगम एक अद्भुत कार्यक्रम है । यहां गौरतलब यह है कि विद्यालय से ही छात्र विभिन्न भाषाओं का सम्मान करना सीखते हैं तथा भारत की विविधता को महसूस करते हैं। भारत ही दुनिया का एक ऐसा अनोखा राष्ट्र है जिसमें राष्ट्र में व्याप्त विविधताओं को समझने की, जानने की अभूतपूर्व संभावनाएं हैं, यही भारत को दुनिया के सभी राष्ट्रों से अनोखा बनाता है, जिस पर हर भारतीय को हर राज्य के व्यक्ति को गर्व होना चाहिए।

दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि किसी विशिष्ट राज्य में अन्य राज्यों के छोटे-छोटे व्यापारियों को, साधारण से लोगों को इस वजह से मारा पीटा जा रहा है कि वह कहीं और से हैं अथवा उनकी भाषा वहां से अलग है इस कृत्य को छुटभैया-पन से ज्यादा और कुछ नहीं कहा जा सकता है। पूर्ण संवेदनशीलता के साथ बौद्धिक जनों का कर्तव्य है कि भारत की एकता के संदर्भ में भाषा का यह जो विवाद जबरदस्ती थोपा जा रहा है इसको कम से कम गलत कहने का साहस तो दिखाना ही चाहिए।

इस राष्ट्र को आगे बढ़ाने के लिए हमें प्रत्येक राज्य के प्रत्येक भाषा भाषी व्यक्ति को सबके साथ मिलकर चलने का प्रयत्न करना चाहिए किसी भी इस प्रकार के बहकावे में आकर अन्य व्यक्ति के ऊपर आक्रामक नहीं हो जाना चाहिए कि वह हमारे राज्य में रहता है और उसे हमारी भाषा नहीं आती।

प्रश्न यह है कि भाषा का यह विवाद कुछ गिने-चुने राज्यों में ही क्यों है? यह किसी ऐसी विचारधारा को पोषित तो नहीं कर रहा है जो भारत की संपूर्ण प्रभुता, एकता और अखंडता पर कुठाराघात करता है? आप सभी विज्ञ हैं निर्णय करें और ऐसे किसी भी कृत्य को जो भारत की प्रगति में बाधक हो सकता है उसे रोकने का जयघोष अवश्य करें।