एवियन, 16 जून (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को एवियन में कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी संग संयुक्त प्रेस वार्ता की। इस दौरान, इजरायल, लेबनान और ईरान से जुड़े मुद्दों पर कड़ा बयान दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि अगर वो न होते तो इजरायल तबाह हो चुका होता।
विभिन्न वैश्विक मुद्दों को लेकर थानी और ट्रंप के बीच बातचीत की। जी7 सम्मेलन से इतर ट्रंप ने अमीर से द्विपक्षीय बातचीत की। मुश्किल घड़ी में सयंम से काम करने के लिए प्रशंसा की और अमेरिका के लिए उन्हें अहम बताया।
इस दौरान, ट्रंप ने इजराय, नेतन्याहू, ईरान समझौते और लेबनान को लेकर अपनी राय जाहिर की। उन्होंने कहा, “इजरायल का अस्तित्व और उसकी सुरक्षा में अमेरिका की भूमिका निर्णायक रही है। उनके नेतृत्व के बिना इजरायल की स्थिति कमजोर हो सकती थी, क्योंकि अन्य कोई राष्ट्रपति वह कदम उठाने को तैयार नहीं था जो उन्होंने उठाए।”
बीबी (इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू) के साथ अपने संबंधों को “बेहद अच्छा” बताया, लेकिन साथ ही कहा कि अब उन्हें “लेबनान के संदर्भ में अधिक जिम्मेदारी से काम करना चाहिए।”
लेबनान की स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा, ” यह देश पहले शिक्षकों, डॉक्टरों और वकीलों के लिए जाना जाता था, लेकिन अब इसकी स्थिति काफी खराब हो चुकी है।”
ट्रंप ने कहा, “इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच संघर्ष बहुत लंबे समय से चल रहा है और इसमें बहुत अधिक लोगों की जान जा रही है। किसी एक व्यक्ति को निशाना बनाने के लिए हर बार पूरी इमारत को गिराना उचित नहीं है, क्योंकि उन इमारतों में कई निर्दोष लोग भी रहते हैं, जो हिज्बुल्लाह से जुड़े नहीं हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने इजरायल को सुझाव दिया था कि हिज्बुल्लाह से निपटने की जिम्मेदारी सीरिया को दी जाए, और उनका मानना है कि “सीरिया शायद यह काम बेहतर तरीके से कर सकता है।”
लेबनान और हिज्बुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई की गति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह संघर्ष बहुत लंबा खिंच रहा है। उनके अनुसार, इस देरी से व्यापक क्षेत्रीय समझौते और खासकर ईरान के साथ चल रही बातचीत पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। हालांकि ये भी माना कि ईरान के मुकाबले लेबनान का संघर्ष छोटा मामला है।
ट्रंप के अनुसार, लेबनान से जुड़े मुद्दों पर उनका इजरायल के साथ “बेहद मजबूत और सकारात्मक संबंध” रहा है, लेकिन उनका मानना है कि यदि वे हस्तक्षेप न करते, तो इजरायल पहले ही तबाह हो सकता था।
उन्होंने यह भी कहा कि इस लंबे संघर्ष का नकारात्मक असर ईरान के साथ चल रही परमाणु वार्ता पर पड़ सकता है।
ईरान परमाणु समझौते को लेकर ट्रंप ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की नीति की आलोचना की और कहा कि वह समझौता ईरान को परमाणु क्षमता की ओर ले जाने वाला रास्ता था, जबकि उनका (ट्रंप का) दृष्टिकोण इसे रोकने वाला “मजबूत ढांचा” है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि उस समय इजरायल के प्रधानमंत्री ने वाशिंगटन जाकर ओबामा से उस समझौते को रोकने की अपील की थी, लेकिन वह सफल नहीं हुए। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने बाद में उस समझौते को समाप्त कर दिया क्योंकि वह उनके अनुसार “एक बड़ी गलती” थी।

