Thursday, June 25, 2026
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भाजपा को चुनाव के वक्त भगवान श्री राम की याद क्यों आती है: नाना पटोले

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नागपुर, 13 जनवरी (आईएएनएस)। महाराष्ट्र से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नाना पटोले ने तेलंगाना से कांग्रेस नेता बोम्मा महेश के उस बयान का समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि पार्टी जाति और धर्म के आधार पर राजनीति करती है। नाना पटोले ने कहा कि भाजपा को चुनाव के वक्त भगवान श्री राम की याद क्यों आती है।

नागपुर में आईएएनएस से बातचीत में कांग्रेस नेता नाना पटोले ने कहा कि तेलंगाना से कांग्रेस नेता ने भाजपा के लिए जो कहा है, उसका अलग मतलब निकाला जा रहा है। मैंने भी वही पढ़ा है। जिस तरह भाजपा चुनाव के दौरान भगवान श्री राम का नाम लेती है, वैसे ही धर्म और राजनीति अलग-अलग हैं। महाराष्ट्र में जहां हम रहते हैं, संतों की बहुत मजबूत परंपरा रही है। भाजपा केवल चुनाव के समय ही श्री राम को याद करती है। इसलिए तेलंगाना से हमारे कांग्रेस विधायकों ने यह बताया कि सिर्फ चुनाव के दौरान भगवान का नाम लेना गलत है। वोट पाने के लिए धर्म का इस्तेमाल करने के बजाय इस बात पर ध्यान देना चाहिए सरकार ने क्या किया। उन्होंने देश पर कैसे शासन किया है, क्या तरक्की हुई है या नुकसान हुआ है, और देश को कैसे चलाया जा रहा है। संविधान के आधार पर ही चुनाव प्रक्रिया होती है। मुझे लगता है कि जिस विधायक ने यह बात कही है, उसका मतलब यह है कि चुनाव के समय श्री राम का नाम लेकर उसे चुनावी मुद्दा बनाना ठीक नहीं है। इस मुद्दे पर भाजपा को सोचना चाहिए। मैं भी हिंदू हूं, मेरे आराध्य भगवान श्री राम हैं, लेकिन राजनीति में उनका इस्तेमाल करना उचित नहीं है।

महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा महात्मा गांधी के आदर्शों को कमजोर करना चाहती है। कांग्रेस ने एक योजना का नाम महात्मा गांधी के नाम पर रखा था और भाजपा उसे बंद करना चाहती है। लोकतंत्र में वे जो जहरीले बीज बो रहे हैं, उन्हें उनके अनुयायी या वामपंथी सोच वाले लोग फैला रहे हैं। महात्मा गांधी कांग्रेस के नहीं, पूरे देश के थे। भाजपा को यह पसंद नहीं है क्योंकि उनके पास कोई ऐसा महात्मा नहीं है। महात्मा गांधी की विचारधारा को खत्म करके जो राजनीति की जा रही है, उससे देश खतरे में पड़ सकता है। यह भाजपा की मानसिकता है।

उन्होंने कहा कि भाजपा सत्ता पाने के लिए जो कुछ भी करना पड़े, वे करेंगे। वे अपनी सुविधा के हिसाब से बार-बार बदल जाते हैं और यही भाजपा का स्वभाव है।

उन्होंने मुंबई में भाषा विवाद पर कहा कि मुंबई में, जहां मराठी भाषा और संस्कृति बहुत मजबूत है, वे कहते हैं कि वे हिंदी को बढ़ावा नहीं देंगे, बल्कि मराठी को बढ़ावा देंगे। मुख्यमंत्री भी यही कहते हैं। लेकिन साथ ही, नवी मुंबई में उनके घोषणापत्र में कहा गया है कि वहां हिंदी को बढ़ावा दिया जाएगा। मुंबई और नवी मुंबई में ज्यादा अंतर नहीं है। भाषा के मुद्दे पर भाजपा के अलग-अलग बयानों से साफ पता चलता है कि वे सत्ता के लिए कुछ भी कर सकते हैं।