Friday, June 12, 2026
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किशनगंज के 15 साल के लड़के के शोषण पर एनएचआरसी ने लिया संज्ञान, पुलिस-प्रशासन से मांगा जवाब

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नई दिल्ली, 15 जनवरी (आईएएनएस)। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने हाल ही में एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर स्वतः संज्ञान लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार के किशनगंज जिले का 15 साल का एक लड़का करीब आठ महीने तक बंधुआ मजदूरी का शिकार रहा। यह घटना हरियाणा के बहादुरगढ़ रेलवे स्टेशन से शुरू हुई, जहां लड़का अपने पिता से अलग हो गया था।

बताया जा रहा है कि लड़का ट्रेन से उतरकर पानी लेने गया था, लेकिन भारी भीड़ के कारण फिर से ट्रेन में नहीं चढ़ पाया। इसके बाद ट्रेन छूट गई और वह अपने पिता के पास नहीं पहुंच सका। वहीं से उसकी जिंदगी मुश्किलों में बदल गई। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उसे एक आदमी ने नौकरी देने के बहाने उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले के ग्रेटर नोएडा इलाके में ले जाकर बंधुआ मजदूरी कराई।

लड़के को सुबह से रात तक काम करना पड़ता था। उससे गाय चराने और चारा काटने जैसे काम कराए गए और अक्सर शारीरिक रूप से मार-पीट भी होती रही। लड़के ने कई बार भागने की कोशिश की, लेकिन हर बार पकड़ लिया गया और बेरहमी से पीटा गया। इतनी यातनाओं के बीच, सबसे बड़ी घटना तब हुई जब चारा काटने की मशीन में उसका बायां हाथ कुचल गया और कुहनी से कट गया। इसके बाद उसे इलाज के लिए भी नहीं भेजा गया और सड़क पर फेंक दिया गया।

कुछ अजनबी व्यक्ति उसे नूंह जिले, हरियाणा के अस्पताल ले गए, लेकिन डर के कारण लड़का वहां से भाग गया और लगभग तीन किलोमीटर पैदल चलकर कहीं पहुंचा। आखिरकार दो सरकारी शिक्षकों ने उसे देखा और घटना की जानकारी जीआरपी बहादुरगढ़, हरियाणा को दी। लड़का अंततः अगस्त 2025 में अपने घर किशनगंज, बिहार लौट सका।

रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि बंधुआ मजदूर को रिहा करने के लिए जरूरी बंधुआ मजदूर रिहाई प्रमाण पत्र अभी तक जारी नहीं हुआ है। ये दस्तावेज सरकार द्वारा दी जाने वाली पुनर्वास और मुआवजे की प्रक्रिया के लिए जरूरी हैं, जो केंद्रीय क्षेत्रीय योजना ‘बंधनमुक्ति पुनर्वास योजना-2021’ के तहत आता है।

एनएचआरसी ने कहा है कि अगर मीडिया रिपोर्ट सही है, तो ये गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन की घटना है। इसलिए आयोग ने हरियाणा के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर के पुलिस कमिश्नर और बिहार के किशनगंज के जिलाधिकारी को नोटिस जारी किया है। इन अधिकारियों से दो हफ्तों के अंदर पूरा विवरण मांगा गया है।

साथ ही आयोग ने यह भी पूछा है कि क्या लड़के को कोई मुआवजा मिला और क्या उसके लिए दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी हुआ है, ताकि वह दिव्यांगता अधिनियम, 2016 के तहत मिलने वाले लाभ ले सके।