Friday, June 12, 2026
SGSU Advertisement
Home राजनीति लंबे औपनिवेशिक शासन के बावजूद भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है:...

लंबे औपनिवेशिक शासन के बावजूद भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है: हरविंदर कल्याण

0
30

चंडीगढ़, 16 जनवरी (आईएएनएस)। दो दिवसीय ‘हरियाणा यूथ डायलॉग’ का दूसरा संस्करण शुक्रवार को हरियाणा विधानसभा में शुरू हुआ, जिसमें 13 राज्यों के 65 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

राजधानी युवा संसद संस्थान के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण ने दीप प्रज्वलित करके किया।

इस अवसर पर बोलते हुए अध्यक्ष कल्याण ने कहा कि भारत ने औपनिवेशिक शासन के एक लंबे और कठिन दौर को सहा है, जिसके दौरान हमारी समृद्ध संस्कृति और मूल्यों को नष्ट करने के प्रयास किए गए। इसके बावजूद, भारत आज विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है। यह हमारे संविधान की शक्ति और हमारे नागरिकों की एकता का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि संविधान हमें सिखाता है कि भारत की सच्ची शक्ति उसके जनमानस में निहित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को साकार करने के लिए हम सभी को मिलकर काम करना होगा।

अध्यक्ष ने कहा कि भारत “विविधता का देश है। यहां विभिन्न भाषाएं, परंपराएं और संस्कृतियां हैं, लेकिन इन सबका एक ही लक्ष्य है: राष्ट्र और राज्य की प्रगति। विभिन्न राज्य विधानसभाओं की भाषाएं भले ही भिन्न हों, लेकिन सभी जन प्रतिनिधियों का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए प्रभावी और कल्याणकारी कार्यक्रम बनाना है।

उन्होंने कहा कि जनता की कठिनाइयों को दूर करना और उनकी जरूरतों को पूरा करना ही सच्चा लक्ष्य है।

अध्यक्ष ने युवाओं से कहा कि आज वे उसी विधानसभा भवन में बैठे हैं जहां से राज्य के कई प्रमुख विधायकों और नेताओं ने कानून निर्माण और हरियाणा के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने आशा व्यक्त की कि यहां उपस्थित युवा भविष्य में जन प्रतिनिधि बनने के अवसर मिलने पर लोकतांत्रिक परंपराओं को आगे बढ़ाएंगे और सदन में सक्रिय एवं सार्थक चर्चाओं में भाग लेंगे।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विचारों की विविधता स्वाभाविक है, लेकिन युवाओं को सकारात्मक सोच के साथ समाधानों की ओर बढ़ना चाहिए ताकि समाज और देश को एक नई दिशा मिल सके।

अध्यक्ष ने कहा कि यदि देश को प्रगति करनी है, तो महिलाओं को सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने वाला एक ऐतिहासिक विधेयक पारित किया गया है।