Monday, July 6, 2026
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शहीदों के बच्चों की शिक्षा में सहयोग, चयनित स्कूलों की ट्यूशन फीस माफ; एमओयू पर हस्ताक्षर

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नई दिल्ली, 16 जनवरी (आईएएनएस)। शिक्षा के क्षेत्र में शहीदों के बच्चों के लिए लाभकारी प्रावधान किए जा रहे हैं। देशभर में संचालित 148 चयनित स्कूलों में इन छात्रों को विशेष शैक्षणिक सहायता प्रदान की जाएगी। यहां एक तय संख्या में शहीद सैनिकों के बच्चों को ट्यूशन फीस में 100 प्रतिशत तक छात्रवृत्ति दी जाएगी।

वहीं, सेवारत एवं सेवानिवृत्त सैनिकों के बच्चों को ट्यूशन फीस में 50 प्रतिशत तक की छात्रवृत्ति मुहैया कराई जाएगी। भारतीय सेना ने अपने सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसके अंतर्गत मुंबई स्थित पोदार एजुकेशन नेटवर्क के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।

भारतीय सेना के मुताबिक इस एमओयू का उद्देश्य सेवारत सैनिकों, पूर्व सैनिकों तथा देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। इस समझौते के तहत पोदार एजुकेशन नेटवर्क के देशभर में संचालित 148 स्कूलों में सैनिकों के बच्चों को विशेष शैक्षणिक सहायता प्रदान की जाएगी।

एमओयू के प्रावधानों के अनुसार, प्रत्येक स्कूल में अधिकतम चार बच्चों को ट्यूशन फीस में 100 प्रतिशत छात्रवृत्ति दी जाएगी। यह सुविधा सेवा के दौरान शहीद हुए या युद्ध हताहत घोषित किए गए सैनिकों के बच्चों को मिलेगी। वहीं सेवारत एवं सेवानिवृत्त सैनिकों के बच्चों के लिए प्रत्येक स्कूल में अधिकतम ट्यूशन फीस में 50 प्रतिशत छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी। यह सुविधा प्रत्येक स्कूल में 10 बच्चों को दी जाएगी। सेना के अनुसार, इसके अतिरिक्त, इस सहायता पैकेज में केवल ट्यूशन फीस ही नहीं, बल्कि पुस्तकें, स्कूल यूनिफॉर्म, स्कूल किट तथा एक बार का प्रवेश शुल्क भी शामिल होगा।

इससे सैनिक परिवारों पर शिक्षा का आर्थिक बोझ कम हो सकेगा। यह पहल भारतीय सेना की अपने सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति सतत प्रतिबद्धता को दर्शाती है। साथ ही, यह एमओयू सेना समुदाय के लिए संस्थागत स्तर पर शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करता है। सेना के अनुसार, यह सुनिश्चित करता है कि सैनिकों के बच्चों को किसी भी परिस्थिति में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित न रहना पड़े। भारतीय सेना का यह कदम न केवल सैनिक परिवारों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में अहम है, बल्कि यह समाज में यह संदेश भी देता है कि राष्ट्र अपने रक्षकों और उनके परिजनों के साथ सदैव खड़ा है।