नई दिल्ली, 20 जनवरी (आईएएनएस)। फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) घोटाले के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने झारखंड, मणिपुर, कोलकाता समेत कई राज्यों में एकसाथ छापेमारी की। करीब 658 करोड़ रुपए के इस बड़े घोटाले से जुड़े व्यक्तियों और फर्मों के ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। इस पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व ईडी की ईटानगर इकाई कर रही है, जिसे संबंधित राज्यों की पुलिस का सहयोग मिल रहा है।
जांच एजेंसी के अनुसार, यह मामला उन फर्मों से जुड़ा है जिन पर बिना किसी वास्तविक वस्तु या सेवा की आपूर्ति के फर्जी इनवॉइस के जरिए आईटीसी जनरेट करने और उसका लाभ उठाने का आरोप है। इस तरह के फर्जी दावे न केवल सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि अक्सर मनी लॉन्ड्रिंग, शेल कंपनियों के नेटवर्क और संगठित आर्थिक अपराध से भी जुड़े होते हैं। ईडी से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस मामले की शुरुआत अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर पुलिस स्टेशन में दर्ज एक एफआईआर से हुई थी।
शिकायत में राकेश शर्मा और आशुतोष कुमार झा सहित अन्य अज्ञात लोगों पर धोखाधड़ी और दस्तावेजों की जालसाजी से जुड़े एक आपराधिक षड्यंत्र में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। शिकायत के अनुसार, एम/एस सिद्धि विनायक ट्रेड मर्चेंट्स नामक फर्म, जो कि जांच में अस्तित्वहीन (नॉन-एग्जिस्टेंट) पाई गई, ने करीब 658.55 करोड़ रुपए मूल्य के फर्जी इनवॉइस के आधार पर 99.31 करोड़ रुपए का इनपुट टैक्स क्रेडिट अवैध रूप से हासिल किया। यह पूरा फर्जीवाड़ा देश के अलग-अलग राज्यों में फैली 58 शेल कंपनियों के जरिए अंजाम दिया गया।
ईडी अब इस घोटाले में फर्जी आईटीसी की आगे की लेयरिंग, शेल कंपनियों के नेटवर्क और इस प्रक्रिया के जरिए लॉन्डर किए गए धन की गहनता से जांच कर रही है। छापेमारी के दौरान दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य अहम सबूतों की जांच की जा रही है, जिससे इस नेटवर्क के अन्य लाभार्थियों और सहयोगियों का भी खुलासा हो सके। इस मामले में ईडी की जांच जारी है।

