Tuesday, July 7, 2026
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कांग्रेस में मुस्लिम नेताओं की अनदेखी पर पूर्व सांसद माजिद मेमन बोले, खड़गे इसे गंभीरता से लें

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मुंबई, 25 जनवरी (आईएएनएस)। कांग्रेस के पूर्व नेता शकील अहमद द्वारा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को ‘डरपोक’ बताए जाने पर पूर्व सांसद माजिद मेमन ने कहा कि राहुल गांधी के बारे में शिकायतें आ रही हैं कि मुस्लिम नेता उनसे मिल नहीं पाते। यह लोकतंत्र के लिए बुरी बात है।

मुंबई में आईएएनएस से बातचीत में पूर्व सांसद माजिद मेमन ने कहा कि कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कई वरिष्ठ मुस्लिम नेताओं ने पहले भी अपनी चिंता जताई है। यह स्पष्ट है कि मुसलमानों को कुछ हद तक किनारे किया जा रहा है। शकील अहमद ने कहा है कि उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं दी जा रही थी, उन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा और उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा था। कांग्रेस के हित में होगा कि इन बातों पर गंभीरता से विचार किया जाए।

एआईएमआईएम नेता इम्तियाज जलील के बयान पर माजिद मेमन ने कहा कि एक नए चुने गए युवा पार्षद ने कहा था, ‘हम मुंब्रा को हरा-भरा बनाएंगे।’ यहां ‘हरे’ का क्या मतलब है? क्या ‘हरा’ का मतलब पाकिस्तान है या मुसलमानों से है? हरा रंग हमारे राष्ट्रीय झंडे का हिस्सा है। मुंब्रा या महाराष्ट्र ही क्यों-पूरे देश को खुशहाल होना चाहिए। केसरिया और हरा, दोनों ही सफेद रंग के साथ हमारे राष्ट्रीय झंडे के अंग हैं।

पूर्व सांसद ने कहा कि अगर कोई कहे कि वह देश को केसरिया बनाना चाहता है, तो क्या इसका मतलब है कि वह पूरे देश को हिंदू बनाना चाहता है? इसी तरह, अगर कोई इसे ‘हरा’ बनाने की बात करता है, तो क्या इसका मतलब है कि सबको मुस्लिम बनाना है? अगर महाराष्ट्र हरा-भरा, समृद्ध, स्वस्थ और खुशहाल है, तो यह बहुत अच्छी बात है। हमें सब मिलकर उस लक्ष्य की ओर काम करना चाहिए।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर दिए बयान पर माजिद मेमन ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की तारीफ करना, जो कांग्रेस की नीतियों के खिलाफ है, वास्तव में पार्टी की विचारधारा और सोच के खिलाफ जाना है। हाल के दिनों में शशि थरूर ने ऐसा रुख अपनाया है जो उनकी अपनी पार्टी को निशाना बनाता हुआ प्रतीत होता है।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संवैधानिक तरीके से काम कर रहे हैं। वहीं, कांग्रेस लंबे समय से गैर-भाजपा सरकारों के दौरान मुद्दों को नजरअंदाज किए जाने की शिकायत करती रही है। थरूर के इस तरह के बयान कांग्रेस के प्रति जानबूझकर उकसावे वाले लगते हैं। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि शायद वह ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरह भाजपा या एनडीए के साथ जा रहे हों, लेकिन यह उनका निजी फैसला है।