Wednesday, July 15, 2026
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बस्तर में सुरक्षा बलों को मिली बड़ी सफलता, विस्फोटक बरामद

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रायपुर/दंतेवाड़ा, 27 जनवरी (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर इलाके में नक्सल विरोधी अभियान में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। उन्होंने दंतेवाड़ा जिले के बारसूर पुलिस स्टेशन क्षेत्र में गुफा गांव के पास जंगल की पहाड़ियों में माओवादियों द्वारा लगाए गए दो इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) बरामद कर उन्हें निष्क्रिय कर दिया।

यह जॉइंट ऑपरेशन मंगलवार को सटीक इंटेलिजेंस इनपुट के बाद हुआ। सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स से 22 जनवरी को मिली जानकारी पर कार्रवाई करते हुए सुबह-सुबह एक कोऑर्डिनेटेड सर्च और डी-माइनिंग मिशन शुरू किया गया। यह ऑपरेशन मंगलवार सुबह शुरू हुआ और इसमें सीआरपीएफ, बॉम्ब डिस्पोजल स्क्वाड और बारसूर पुलिस स्टेशन के अधिकारी शामिल थे।

गुफा गांव के आसपास घने जंगल वाले इलाके में सर्च ऑपरेशन के दौरान टीमों को माओवादियों द्वारा छिपाए गए विस्फोटक मिले। बरामद चीजों में एक डेटोनेटर लगा हुआ डायरेक्शनल पाइप बम था, जिसका वजन लगभग 5 किलोग्राम था, और एक प्रेशर कुकर इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस था, जिसका वजन लगभग 5 किलोग्राम था, जो 15 मीटर तार से जुड़ा हुआ था।

दोनों डिवाइस को तुरंत एक सुरक्षित जगह पर ले जाया गया और बॉम्ब डिस्पोजल स्क्वाड ने उन्हें नष्ट कर दिया, जिससे सुरक्षा कर्मियों और स्थानीय नागरिकों को होने वाला कोई भी खतरा खत्म हो गया।

195 बटालियन के कमांडेंट अनिल कुमार सिंह ने यंग प्लाटून और असिस्टेंट कमांडेंट हिमांशु के नेतृत्व वाली बॉम्ब डिस्पोजल टीम के साथ मिलकर ऑपरेशन को अंजाम दिया। पुलिस अधीक्षक गौरव राय और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आरके बर्मन दंतेवाड़ा जिले में तेज एंटी-नक्सल पेट्रोलिंग और एरिया डोमिनेशन के प्रयासों की देखरेख कर रहे हैं।

यह ताजा बरामदगी एजेंसियों के बीच भरोसेमंद इंटेलिजेंस शेयरिंग द्वारा समर्थित लगातार ग्राउंड ऑपरेशन की प्रभावशीलता को उजागर करती है।

अधिकारियों ने इस ऑपरेशन को क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों के लिए एक महत्वपूर्ण झटका बताया, जिससे पेट्रोलिंग पार्टियों और ग्रामीणों पर संभावित घात लगाकर हमले या हमलों को रोका जा सका।

विस्फोटकों को तेजी से निष्क्रिय करना सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स, स्थानीय पुलिस और इंटेलिजेंस यूनिट के बीच उच्च स्तर के तालमेल को दिखाता है।

बस्तर डिवीजन में काम कर रहे नक्सली समूहों के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को कमजोर करने में ऐसी बरामदगी को महत्वपूर्ण माना जाता है।