नई दिल्ली, 1 मार्च (आईएएनएस)। सनातन धर्म में पंचांग का बहुत महत्व है। यह न केवल सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय बताता है, बल्कि दिन के शुभ और अशुभ मुहूर्त की पूरी जानकारी भी देता है। 2 मार्च को देवाधिदेव महादेव को समर्पित सोमवार और शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है, जिसमें अभिजित मुहूर्त और रवि योग जैसे शुभ संयोग हैं, लेकिन भद्रा की छाया और कुछ अशुभ योग भी मौजूद रहेंगे।
सूर्योदय 6 बजकर 45 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 21 मिनट पर होगा। शुक्ल चतुर्दशी तिथि शाम 5 बजकर 55 मिनट तक रहेगी, इसके बाद पूर्णिमा शुरू होगी। हालांकि, उदयातिथि के अनुसार पूरे दिन चतु्र्दशी रहेगी। नक्षत्र अश्लेषा सुबह 7 बजकर 51 मिनट तक रहेगा, फिर मघा नक्षत्र शुरू होगा। योग अतिगंड दोपहर 12 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। करण वणिज शाम 5 बजकर 55 मिनट तक और विष्टि अगले दिन सुबह 5 बजकर 28 मिनट तक रहेगा।
रवि योग और अभिजित मुहूर्त में नए कार्य, पूजा-पाठ या शुभ कार्य शुरू करना उत्तम रहता है। राहुकाल, यमगंड और भद्रा के समय महत्वपूर्ण काम को टालने या न करने की सलाह देते हैं। पंचांग के अनुसार दिन की शुरुआत शुभ संयोगों के साथ हो रही है, लेकिन अशुभ काल का ध्यान रखना जरूरी है।
शुभ मुहूर्त की बात करें तो सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 6 मिनट से 5 बजकर 56 मिनट तक अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 10 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक है। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 29 मिनट से 3 बजकर 16 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 19 मिनट से 6 बजकर 44 मिनट तक है। वहीं, रवि योग सुबह 6 बजकर 45 मिनट से 7 बजकर 51 मिनट तक है। यह योग विशेष शुभ फलदायी होता है।
2 मार्च के अशुभ समय की बात करें तो दृक पंचांग के अनुसार, राहुकाल सुबह 8 बजकर 12 मिनट से 9 बजकर 39 मिनट तक है। यमगंड सुबह 11 बजकर 6 बजे से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक है। गुलिक काल दोपहर 2 बजे से 3 बजकर 27 मिनट तक और दुर्मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 57 मिनट से 1 बजकर 43 मिनट तक है। भद्रा शाम 5 बजकर 55 मिनट से अगले दिन सुबह 5 बजकर 28 बजे तक भद्रा की छाया इस दिन रहेगी। वहीं, गंड मूल पूरे दिन प्रभावी रहेगा।

