राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सहारे भारत बना रहा वैश्विक एआई महाशक्ति, 2027 तक एआई बाजार में तेज वृद्धि की उम्मीद

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नई दिल्ली, 3 मार्च (आईएएनएस)। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के समर्थन से भारत शिक्षा के सभी स्तरों पर एआई शिक्षण और रिसर्च को एकीकृत करके खुद को एक वैश्विक एआई महाशक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है। 1.79 लाख आईसीटी प्रयोगशालाओं में 7,634 करोड़ रुपए के निवेश और उत्कृष्टता केंद्रों तथा विश्वविद्यालय कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से एक मजबूत अनुसंधान से कार्यबल शृंखला के साथ, देश ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों तक भी पहुंचने वाला एक व्यापक एआई प्रतिभा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर रहा है।

भारत वैश्विक एआई पावरहाउस के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है और इस क्षेत्र में तेजी से विकास कर रहा है। 2024 में 89 प्रतिशत नए स्टार्टअप एआई-संचालित थे और 87 प्रतिशत उद्यम सक्रिय रूप से एआई का उपयोग कर रहे हैं। भारतीय एआई बाजार के 2027 तक 25 प्रतिशत से 35 प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद है। 2024 में भारत के पास छह लाख से ज्यादा एआई प्रतिभाओं को पूल था। 2027 तक 15 प्रतिशत सीएजीआर की दर से 1.25 मिलियन से अधिक एआई प्रोफेशनल्स की आवश्यकता होगी।

सरकार की विभिन्न पहलें और नीतियां एआई (सूचना प्रौद्योगिकी) द्वारा श्रम बाजार में लाए गए अभूतपूर्व बदलाव को संबोधित कर रही हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 आर्थिक विकास, शैक्षिक चुनौतियों के समाधान, शिक्षकों की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए एआई की क्षमता को मान्यता देती है, और सभी शैक्षिक स्तरों पर एआई-आधारित शिक्षा के महत्व और व्यक्तिगत शिक्षण पर जोर देती है। इंडिया एआई मिशन (मार्च 2024 में शुरू किया गया) का लक्ष्य सरकार, संस्थानों, स्टार्टअप्स, निजी क्षेत्र और शिक्षा जगत में नवाचार को बढ़ावा देकर भारत को वैश्विक एआई अग्रणी बनाना है।

इस रणनीति का मूल आधार तकनीक का लोकतंत्रीकरण है। यह सुनिश्चित करना कि एआई उपकरण और डिजिटल प्लेटफॉर्म दूरदराज के गांवों, आदिवासी क्षेत्रों और वंचित समुदायों तक पहुंचें, जिससे डिजिटल विभाजन को पाटा जा सके। यह दृष्टिकोण विकसित भारत 2047 की परिकल्पना के अनुरूप है, जो भारत को एक समावेशी वैश्विक एआई नेता के रूप में स्थापित करता है।