नई दिल्ली, 4 मार्च (आईएएनएस)। सनातन धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है। यह रोजाना के शुभ-अशुभ मुहूर्त, तिथि, नक्षत्र, योग और विभिन्न कालों की पूरी जानकारी देता है। 5 मार्च को गुरुवार और कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि रहेगी, जो शाम 5 बजकर 3 मिनट तक चलेगी। इसके बाद तृतीया तिथि शुरू होगी। उदयातिथि के अनुसार पूरे दिन द्वितीया तिथि रहेगी।
नक्षत्र की बात करें तो उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र सुबह 8 बजकर 17 मिनट तक रहेगा, उसके बाद हस्त नक्षत्र शुरू हो जाएगा। दिन का योग शूल रहेगा, जो सुबह 7 बजकर 46 मिनट तक प्रभावी रहेगा। करण गर शाम 5 बजकर 3 मिनट तक रहेगा।
कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि की शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 4 मिनट से 5 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। सबसे महत्वपूर्ण है अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 9 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक, जिसमें इस दिन विजय मुहूर्त का भी संयोग बन रहा है। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। यह दोनों शुभ मुहूर्त नए कार्य, शुभ कार्य या महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए अत्यंत उत्तम माने जाते हैं। वहीं, गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 21 मिनट से 6 बजकर 46 मिनट तक रहेगी।
गुरुवार को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 42 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 23 मिनट पर होगा। वहीं, सुबह अमृतकाल 3 बजकर 11 मिनट से अगले दिन 4 बजकर 52 मिनट रहेगा।
अशुभ समय में राहुकाल दोपहर 2 बजे से 3 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। यमगण्ड सुबह 6 बजकर 42 मिनट से 8 बजकर 10 मिनट तक, गुलिक काल सुबह 9 बजकर 37 मिनट से 11 बजकर 5 मिनट तक और दोपहर 3 बजकर 16 मिनट से 4 बजकर 3 मिनट तक रहेगा। दुर्मुहूर्त सुबह 10 बजकर 36 मिनट से 11 बजकर 23 मिनट तक और दोपहर 3 बजकर 16 मिनट से 4 बजकर 3 मिनट तक रहेगा। गुरुवार को भद्रा की छाया भी रहेगी।
गुरुवार नारायण, विजय की देवी मां पितांबरा और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित है। इस पूजा -पाठ में पीले चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए। नारायण को केला, हल्दी और गुड़ के साथ चने की दाल, पीली मिठाई चढ़ाने और भोग लगाने का विधान है।

