नई दिल्ली, 18 मार्च (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत में लिए जाने को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की।
उन्होंने सोनम वांगचुक के खिलाफ केस दर्ज किए जाने को शर्मनाक बताया और सरकार से आग्रह किया कि वह लेह-लद्दाख को लेकर उनकी मांगों पर ध्यान दे।
आईएएनएस से बात करते हुए उन्होंने कहा, “उन्होंने पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज उठाई है और एक समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं, फिर भी बिना किसी गलती के उन्हें जेल में डाल दिया गया। रिहा होने के बाद भी उनका संघर्ष जारी है। यह संघर्ष किसी टकराव या अशांति के लिए नहीं है, बल्कि उनसे किए गए वादों को पूरा करने के लिए है। जब अनुच्छेद 370 हटाया गया था, तब उन्होंने इस कदम का स्वागत किया था।”
उन्होंने कहा, “अगर अब वह अपनी बात रख रहे हैं, तो इससे पता चलता है कि सरकार की तरफ से कुछ कमियां हो सकती हैं। मेरा मानना है कि जम्मू-कश्मीर में पूर्ण राज्य का दर्जा लागू किया जाना चाहिए और लेह-लद्दाख को लेकर सोनम वांगचुक की मांगों को सुना जाना चाहिए।”
ये टिप्पणियां वांगचुक की जोधपुर सेंट्रल जेल से रिहाई के बाद आई हैं। करीब छह महीने हिरासत में रहने के बाद केंद्र सरकार ने एनएसए के तहत उनकी निवारक हिरासत को रद्द कर दिया था, जिसके बाद उन्हें रिहा किया गया।
वहीं, कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे को लेकर सियासत तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने इस पर चिंता जताई है।
उन्होंने आईएएनएस से कहा कि यह गंभीर मामला है कि कांग्रेस के नेताओं को लगातार ‘तोड़ा’ जा रहा है और उन्हें भारतीय जनता पार्टी में शामिल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब तो चुने हुए जनप्रतिनिधि भी पार्टी बदल रहे हैं।
प्रियंका चतुर्वेदी ने तंज कसते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वह खुद एक ‘इंपोर्टेड सीएम’ हैं।
इसी दौरान उन्होंने यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि देश के कई राज्यों में यूसीसी की मांग उठती रही है और सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर बहु-हितधारकों से चर्चा और लोगों का भरोसा जीतने की बात कही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगर गुजरात में UCC लागू किया जाता है, तो यह राजनीतिक प्रभाव से दूर रहकर किया जाए। साथ ही, इसे सोच-समझकर और सभी वर्गों को साथ लेकर लागू किया जाए ताकि इसका असली फायदा जनता को खासकर महिलाओं को मिल सके।

