चुनाव आयोग का तमिलनाडु की निजी कंपनियों को निर्देश, मतदान के दिन कर्मचारियों को दें पेड लीव

0
13

चेन्नई, 19 मार्च (आईएएनएस)। तमिलनाडु में होने वाले विधानसभा चुनावों में ज्यादा से ज्यादा लोग वोट डाल सकें, इसके लिए चुनाव आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। गुरुवार को आयोग ने सभी प्राइवेट कंपनियों और फैक्ट्रियों को आदेश दिया कि मतदान के दिन अपने कर्मचारियों को पेड लीव देनी होगी। किसी को भी वोट डालने के लिए नौकरी या वेतन की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।

तमिलनाडु में 23 अप्रैल को विधानसभा चनाव के लिए मतदान होना है और वोटों की गिनती 4 मई को होगी। चुनाव आयोग ने साफ कहा है कि प्राइवेट सेक्टर के सभी योग्य मतदाताओं को मतदान के दिन छुट्टी देना अनिवार्य है, चाहे उनका काम किसी भी तरह का हो।

यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि कोई भी कर्मचारी पेशेवर बाधाओं या वेतन की चिंता के कारण अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल करने से वंचित न रहे।

आयोग ने जोर देकर कहा है कि यह आदेश केवल सुझाव नहीं है बल्कि कानून के तहत अनिवार्य है। सभी नियोक्ताओं को पहले से ही व्यवस्था करने को कहा गया है ताकि कर्मचारियों के वोटिंग में भाग लेने में कोई रुकावट न आए और औद्योगिक गतिविधियां भी प्रभावित न हों।

यदि कोई कंपनी या फैक्ट्री इस आदेश का पालन नहीं करती है, तो चुनाव आयोग ने चेतावनी दी है कि उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसकी मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी श्रम विभाग को दी गई है, जो नियमों का पालन न करने वाले संगठन पर कानूनी कार्रवाई शुरू करेगा। साथ ही, कर्मचारियों की शिकायतें भी गंभीरता से सुनी जाएंगी और तुरंत जांच की जाएगी।

आयोग के इस फैसले से खासकर उन कर्मचारियों को फायदा होगा जिनके लिए आम तौर पर उपस्थिति अनिवार्य होती है, जैसे मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, सर्विस इंडस्ट्री और दैनिक मजदूरी वाले कामकाजी लोग। अब उन्हें वोट डालने के लिए नौकरी छोड़ने या वेतन खोने की चिंता नहीं होगी। यह कदम सीधे तौर पर मतदान में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए उठाया गया है।

तमिलनाडु के अलावा इसी तरह की सुविधा केरल, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल में भी मतदान के दिन लागू की गई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि चुनाव आयोग पूरे देश में मतदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए गंभीर है।

चुनाव आयोग ने सभी योग्य नागरिकों से भी अपील की है कि वे अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल करें और सक्रिय रूप से मतदान में भाग लें। यह अधिकार हर नागरिक के लिए मौलिक है और इसका इस्तेमाल करने से ही लोकतंत्र मजबूत होता है।