मुंबई, 28 मई (आईएएनएस)। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने संगठित ड्रग तस्करी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए ड्रग तस्कर राहुल बालकृष्ण शेडगे को हिरासत में लिया है। आरोपी को 27 मई को पकड़ा गया और बाद में नवी मुंबई की तलोजा सेंट्रल जेल भेज दिया गया।
एनसीबी के अनुसार, यह कार्रवाई भारत सरकार के पीआइटी-एनडीपीएस डिवीजन के संयुक्त सचिव द्वारा 14 मई 2026 को जारी निरोध आदेश के तहत की गई। अधिकारियों ने बताया कि राहुल बालकृष्ण शेडगे लंबे समय से ड्रग तस्करी और अवैध मादक पदार्थों के निर्माण से जुड़ी गतिविधियों में शामिल था। उसे एनसीबी और डीआरआई सहित विभिन्न एजेंसियां अब तक चार बार गिरफ्तार कर चुकी हैं।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, राहुल को रसायन विज्ञान की अच्छी जानकारी है। उसने वर्ष 2009 में ड्रग तस्करी की दुनिया में कदम रखा था, जब डीआरआई मुंबई ने उसे अल्प्राजोलम, नॉर्डाजेपाम, एम्फेटामिन और डाइजेपाम जैसे ड्रग्स से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया था।
जमानत मिलने के बाद भी उसने अपना अवैध कारोबार जारी रखा। वर्ष 2012 में एनसीबी मुंबई ने उसे कई शहरों में फैले एक बड़े केटामाइन तस्करी मामले में गिरफ्तार किया था।
इसके बाद वर्ष 2018 में डीआरआई मुंबई ने उसे अवैध ड्रग्स बनाने की कोशिश के आरोप में फिर गिरफ्तार किया। हालांकि इसके बावजूद वह ड्रग नेटवर्क से जुड़ा रहा।
एनसीबी ने बताया कि वर्ष 2025 में राहुल बालकृष्ण शेडगे को एक ऐसे रसायन के अवैध निर्माण के मामले में गिरफ्तार किया गया, जो केटामाइन बनाने की प्रक्रिया से ठीक एक चरण पहले का केमिकल था।
उसने रायगढ़ जिले में एक रासायनिक लैब बनाई थी, जहां वह ऐसा रासायनिक यौगिक तैयार कर रहा था, जो ड्रग उत्पाद से सिर्फ एक कदम नीचे था। एजेंसियों का कहना है कि उसने यह तरीका इसलिए अपनाया ताकि एनडीपीएस एक्ट, 1985 के सीधे दायरे में आने से बच सके।
एनसीबी के मुताबिक, आरोपी की लगातार आपराधिक गतिविधियों को देखते हुए उसके खिलाफ केस दर्ज कर हिरासत में लेने की कार्रवाई की गई। ब्यूरो ने कहा कि यह कार्रवाई संगठित ड्रग सिंडिकेट और आदतन अपराधियों के खिलाफ अभियान का हिस्सा है। एनसीबी ने दोहराया कि वह ‘2047 तक नशा मुक्त भारत’ के लक्ष्य को लेकर प्रतिबद्ध है।
एनसीबी ने लोगों से अपील की है कि ड्रग्स से जुड़ी किसी भी जानकारी को मानस राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन के टोल फ्री नंबर 1933 पर साझा करें। ब्यूरो ने कहा कि सूचना देने वालों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

