ट्रंप की पर्ल हार्बर वाली टिप्पणी से जापान की प्रधानमंत्री नाराज

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वॉशिंगटन, 20 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर अमेरिकी हमलों को गुप्त रखने के फैसले का बचाव करते हुए पर्ल हार्बर का हवाला दिया। हालांकि इस टिप्पणी से व्हाइट हाउस में हुई बैठक के दौरान जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची असहज नजर आईं। इससे दोनों देशों के बीच सहयोग के गर्मजोशी भरे प्रदर्शन के बीच एक अटपटा क्षण पैदा हो गया।

यह बातचीत उस समय हुई जब ट्रंप से पूछा गया कि यूरोप और एशिया के सहयोगी देशों, जिनमें जापान भी शामिल है, को हमले से पहले क्यों नहीं बताया गया।

ट्रंप ने कहा, “देखिए, एक बात यह है कि आप बहुत ज्यादा संकेत नहीं देना चाहते।” उन्होंने कहा कि जब हम गए, तो हम बहुत जोरदार तरीके से गए, और हमने किसी को इसके बारे में नहीं बताया क्योंकि हम उन्हें चौंकाना चाहते थे।

इसके बाद उन्होंने जापान के 1941 के पर्ल हार्बर हमले का जिक्र किया। ट्रंप ने कहा, “सरप्राइज के बारे में जापान से बेहतर कौन जानता है, ठीक है? आपने मुझे पर्ल हार्बर के बारे में क्यों नहीं बताया।” आप सरप्राइज में हमसे कहीं ज्यादा विश्वास रखते हैं, और हमें उन्हें चौंकाना था, और हमने ऐसा किया।

उन्होंने तर्क दिया कि सहयोगियों को पहले से जानकारी न देने का फैसला सैन्य बढ़त बनाए रखने के लिए था। “इसी सरप्राइज की वजह से, पहले दो दिनों में हमने शायद 50 प्रतिशत लक्ष्य को खत्म कर दिया और जितना हमने अनुमान लगाया था उससे भी ज्यादा। तो अगर मैं पहले ही सबको बता देता, तो फिर सरप्राइज नहीं रहता, है ना?”

विदेशी मीडिया पूल रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप की इस तुलना पर ताकाइची ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। उनकी आंखें चौड़ी हो गईं और मुस्कान गायब हो गई और वह “पीछे की ओर झुक गईं, अपने हाथ समेटते हुए, पर्ल हार्बर का अचानक जिक्र होने से स्पष्ट रूप से चौंक गईं।”

यह टिप्पणी इसलिए भी अलग नजर आई क्योंकि बाकी दौरे के दौरान दोनों नेताओं की भाषा असामान्य रूप से दोस्ताना रही थी।

ट्रंप ने बार-बार ताकाइची की तारीफ करते हुए उन्हें “महान महिला” बताया और कहा कि उनके बीच “बहुत अच्छे संबंध” हैं। डिनर के दौरान उन्होंने उन्हें “शानदार महिला” कहा और कहा, “व्हाइट हाउस में आपका हमारे साथ होना सम्मान की बात है।”

ताकाइची ने भी इस व्यक्तिगत तालमेल को आगे बढ़ाया। उन्होंने ट्रंप से कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि डोनाल्ड और मैं इस साझा लक्ष्य को हासिल करने के लिए सबसे अच्छे साथी हैं,” और बाद में कहा, “जापान वापस आ गया है।”

फिर भी, पर्ल हार्बर वाली टिप्पणी ने कुछ समय के लिए इस सावधानीपूर्वक बनाए गए माहौल को तोड़ दिया।

जापान के लिए उनका व्यापक संदेश यह था कि जब अपने हित सीधे जुड़े हों, तो सहयोगी देशों को “आगे आना चाहिए”, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के संदर्भ में। उन्होंने कहा, “मैं उम्मीद करता हूं कि जापान आगे आएगा क्योंकि हमारे बीच ऐसा संबंध है। जापान के मामले में, मैंने सुना है कि वह अपना 90 प्रतिशत से अधिक तेल इसी जलडमरूमध्य से प्राप्त करता है।”

बैठक के दौरान ताकाइची ने पर्ल हार्बर वाली टिप्पणी पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। चीन के मुद्दे पर उन्होंने संतुलित रुख अपनाया और कहा कि जापान “चीन के साथ संवाद के लिए लगातार खुला रहा है” और उसे उम्मीद है कि अमेरिका-चीन संबंध “क्षेत्रीय सुरक्षा” और “वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला” को मजबूत करेंगे।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका और जापान ने अपने संबंधों को फिर से मजबूत किया और यह वॉशिंगटन के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक बन गया। पर्ल हार्बर आज भी एक बेहद प्रतीकात्मक और संवेदनशील ऐतिहासिक संदर्भ है, भले ही अब दोनों देश रक्षा, व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा में घनिष्ठ सहयोग कर रहे हैं।