नई दिल्ली, 20 मार्च (आईएएनएस)। सनातन धर्म में भगवती की आराधना को समर्पित चैत्र नवरात्रि का पर्व विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि नवरात्रि के नौ दिनों में शक्ति की आराधना से भक्ति, शक्ति और आस्था के साथ आरोग्य का वरदान माता देती हैं। साथ ही, हर प्रकार के भय से भी मुक्त करती हैं।
नवरात्रि में कई भक्त पूरे नौ दिन व्रत रखकर माता दुर्गा की आराधना, पूजा-पाठ करते हैं। इस दौरान दुर्गा कवच (देवी कवच) का पाठ बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह मार्कंडेय पुराण में वर्णित दुर्गा सप्तशती का एक शक्तिशाली हिस्सा है, जिसे ब्रह्मा जी ने ऋषि मार्कंडेय को बताया था। दुर्गा कवच मां दुर्गा के नौ रूपों द्वारा साधक के पूरे शरीर की रक्षा करता है।
यह स्तोत्र न केवल शारीरिक रक्षा करता है, बल्कि मानसिक शांति और आध्यात्मिक बल भी प्रदान करता है। धर्म शास्त्रों में वर्णित है कि दुर्गा सप्तशती के नित्य पाठ करने से भय, नकारात्मकता की समस्या, शत्रु, रोग से मुक्ति मिलती है। यह आरोग्य, समृद्धि, मनोकामना पूर्ति, सुख-शांति और मोक्ष प्रदान करने वाला बताया गया है।
दुर्गा सप्तशती के कवच में उल्लेखित है कि दुर्गा के विभिन्न रूप भक्तों के अलग-अलग अंगों की रक्षा करते हैं। यह कवच साधक को हर प्रकार के भय से मुक्त रखता है और सभी रोगों का नाश करता है। सच्चे मन से पाठ करने वाले को हर संकट से सुरक्षा मिलती है। नवरात्रि में सुबह या शाम इस कवच का पाठ करने से घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
कवच में उल्लेखित है कि चामुंडा देवी सिर की रक्षा, माता शैलजा आंखों की विशालाक्षी कानों की रक्षा करती हैं। माहेश्वरी नाक, महाकाली मुंह की सरस्वती जीभ की और वाराही देवी गर्दन की रक्षा करती हैं। अंबिका हृदय की रक्षा करती हैं और कौमारी भुजाओं की रक्षा, चंडिका हाथों की रक्षा, नारायणी उदर (पेट) की रक्षा करती हैं और माहेश्वरी कमर की रक्षा करती हैं।
देवी महालक्ष्मी जांघों की रक्षा, भैरवी घुटनों की रक्षा, महाकाली पिंडलियों (जांघों के पीछे) की रक्षा तो ब्रह्मांड की देवी (दुर्गा) पैरों और पूरे शरीर की रक्षा करती हैं।

