तेलंगाना विधानसभा में 2026-27 के लिए 3.24 लाख करोड़ रुपए का बजट पेश

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हैदराबाद, 20 मार्च (आईएएनएस)। तेलंगाना सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 3.24 लाख करोड़ रुपए का बजट पेश किया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने शुक्रवार को विधानसभा में कांग्रेस सरकार का तीसरा पूर्ण बजट प्रस्तुत किया।

वित्त मंत्री ने बताया कि इस बजट में कुल व्यय 3,24,234 करोड़ रुपए प्रस्तावित है। इसमें राजस्व व्यय 2,34,406 करोड़ रुपए और पूंजीगत व्यय 47,267 करोड़ रुपए रखा गया है। उन्होंने कहा कि यह बजट राज्य के संतुलित और तेज विकास को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इससे पहले वर्ष 2025-26 के लिए 3.04 लाख करोड़ रुपए का बजट पेश किया गया था।

आर्थिक स्थिति पर बात करते हुए विक्रमार्का ने बताया कि 2025-26 में तेलंगाना की सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) वृद्धि दर 10.7 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत 8 प्रतिशत से 2.7 प्रतिशत अधिक है। वर्तमान कीमतों पर राज्य का जीएसडीपी 17,82,198 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि देश की जीडीपी में तेलंगाना का योगदान 5 प्रतिशत है, जो इसे देश की मजबूत आर्थिक ताकत बनाता है।

उन्होंने बताया कि जहां भारत की विकास दर 2024-25 के 9.8 प्रतिशत से घटकर 8 प्रतिशत हो गई, वहीं तेलंगाना की वृद्धि दर 10.6 प्रतिशत से बढ़कर 10.7 प्रतिशत हो गई है। इससे साफ है कि राज्य लगातार प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।

प्रति व्यक्ति आय के मामले में भी तेलंगाना ने बेहतर प्रदर्शन किया है। 2025-26 में राज्य की प्रति व्यक्ति आय 4,18,931 रुपए रही, जो 10.2 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है। वहीं राष्ट्रीय प्रति व्यक्ति आय 2,19,575 रुपए और वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रही। इस तरह तेलंगाना की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से 1,99,356 रुपए अधिक है।

वित्त मंत्री ने राज्य के भविष्य के लक्ष्यों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार 2034 तक 200 बिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था को बढ़ाकर 1 ट्रिलियन डॉलर और 2047 तक 3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके लिए अलग-अलग क्षेत्रों के लिए विशेष योजनाएं तैयार की जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि कई चुनौतियों और वित्तीय दबावों के बावजूद तेलंगाना तेजी से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। यह बजट किसानों के कल्याण, महिला सशक्तीकरण, युवाओं के लिए रोजगार, कौशल आधारित शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, छात्रों के पोषण और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को प्राथमिकता देता है।

मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने पिछली सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उसकी अधिक उधारी के कारण राज्य की अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ पड़ा। इस स्थिति को सुधारने के लिए 25,612 करोड़ रुपए के कर्ज को कम ब्याज दर पर पुनर्गठित किया गया। इसके साथ ही कर्ज चुकाने की अवधि को 20 से 39 साल तक बढ़ा दिया गया।

इस कर्ज पुनर्गठन के चलते 2025-26 से 2031-32 के बीच देय राशि 34,058 करोड़ रुपए से घटकर 11,915 करोड़ रुपए रह गई। इससे राज्य के नकदी प्रवाह में 22,142 करोड़ रुपए की राहत मिली है, जो आर्थिक स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।