कोलकाता, 23 मार्च (आईएएनएस)। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल में एक बार फिर लाखों रुपए की नकदी बरामद की गई है।
कूच बिहार जिले में पश्चिम बंगाल-असम सीमा के पास बख्शीरहाट पुलिस थाना क्षेत्र के भीतर दो अलग-अलग चेकपॉइंट पर तलाशी के दौरान पुलिस और स्टैटिक सर्विलांस टीम (एसएसटी) के अधिकारियों ने तीन गाड़ियों से 3.7 लाख रुपए से ज्यादा का कैश बरामद किया।
इस घटना के संबंध में पुलिस ने असम के एक निवासी सहित तीन लोगों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ शुरू कर दी है। आगामी राज्य विधानसभा चुनावों से पहले नकदी की इस बरामदगी ने पूरे जिले में हलचल मचा दी है।
पुलिस के मुताबिक, रविवार की रात को बख्शीरहाट के जोराई मोड़ चेकपॉइंट पर तैनात पुलिसकर्मियों ने पश्चिम बंगाल की लाइसेंस प्लेट वाली एक चार पहिया गाड़ी को असम से राज्य में प्रवेश करते समय रोका। तलाशी के दौरान, वाहन के अंदर मिले एक बैग से 57,700 रुपए की राशि बरामद की गई।
पुलिस ने कार में यात्रा कर रहे दार्जिलिंग निवासी बीरेंद्र साहा द्वारा नकदी के लिए कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत न कर पाने के बाद धनराशि जब्त कर ली। साथ ही, आरोपी व्यक्ति को हिरासत में ले लिया गया।
इसी बीच, बख्शीरहाट पुलिस स्टेशन के पुलिसकर्मियों ने संकोश चेकपॉइंट पर कुमारग्राम के बारबिशा निवासी विकाश साहा के वाहन की तलाशी ली। उस वाहन से 1,14,300 रुपए नकद बरामद किए गए। विकाश साहा भी पैसे से संबंधित कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सके, इसलिए पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
सोमवार की सुबह चुनाव आयोग के एसएसटी और संकोश चेकपॉइंट पर तैनात पुलिस कर्मियों ने एक बार फिर असम की लाइसेंस प्लेट वाली एक गाड़ी को पश्चिम बंगाल में प्रवेश करते समय रोका।
वाहन की तलाशी लेने पर पुलिस ने 1,99,500 रुपए नकद बरामद किए। चूंकि असम निवासी टोटन भौमिक पैसे के लिए वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सका, इसलिए पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ शुरू कर दी है।
चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, उचित दस्तावेजों के बिना निर्धारित सीमा से अधिक नकदी लेकर यात्रा करना दंडनीय अपराध है। परिणामस्वरूप, चूंकि कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके, इसलिए पुलिस ने तीनों वाहनों से बरामद नकदी को जब्त कर लिया है।
हालांकि, बख्शीरहाट पुलिस वर्तमान में इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस पैसे का इस्तेमाल किसी अवैध गतिविधि के लिए या चुनाव से पहले मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए किया जाना था।

